नोएडा हिंसा मामले में छात्रा को राहत नहीं, सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत देने से किया इनकार
नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार छात्रा को सर्वोच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत देने से इनकार करते हुए छात्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने के बजाय पहले उच्च न्यायालय का रुख किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में पहले से ही लगभग 93 हजार मामले लंबित हैं। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर व्यक्ति सीधे सर्वोच्च न्यायालय पहुंच रहा है, जबकि ऐसे मामलों में पहले उच्च न्यायालय जाना उचित है।
छात्रा आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने कारण स्पष्ट नहीं किए और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। वकील ने यह भी बताया कि आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं और उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने केशव आनंद नामक व्यक्ति की याचिका पर उत्तर प्रदेश पुलिस को नोटिस भी जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस द्वारा प्रताड़ना की गई और हिरासत में अनुचित व्यवहार किया गया।
इससे पहले नोएडा की एक अदालत ने आकृति चौधरी, मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता नाम की तीन महिलाओं की पुलिस रिमांड को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी थी। इन सभी पर 13 अप्रैल को औद्योगिक मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि पूछताछ के दौरान उनके वकीलों को मौजूद रहने की अनुमति दी जाएगी।
गौरतलब है कि 13 अप्रैल को नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
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