नवरात्रि माता ज्वाला जी का मेला मैसरखाना
मौर मंडी, 29 सितंबर (सुरेश रहेजा, परवीन कुमार, साहिल रहेजा) : माइसरखाना गाँव का यह ऐतिहासिक मेला हर साल अस्सू और चेत की नवरात्रि पर लगता है और इस बार भी नवरात्रि पर ही लगता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह मेला माता ज्वाला जी द्वारा अपने भक्त कमालू को दिए गए दर्शन और उस वर्ष माता ज्वाला जी द्वारा अस्सू और चेत को उनके गाँव के मंदिर में दर्शन देने के कारण प्रसिद्ध हुआ है। ऐतिहासिक कथा के अनुसार, इस गाँव के एक ज़मींदार बाबा कमालू, नथाना के बाबा कालू नाथ के शिष्य थे। वे हर साल बाबा कालू नाथ के साथ ज्वाला जी (हिमाचल प्रदेश) जाते थे। बाबा कमालू ने बाबा कालू जी से कहा कि कितना अच्छा होगा यदि माता जी का मेला मेरे गाँव मैसरखाना में लगे। बाबा कमालू प्रतिदिन दूध लेकर नथाना वाले बाबा कालू जी के पास जाते थे। एक बार बाबा कालू नाथ बाबा कमालू ने कोढ़ियों को बहुत सारा दूध पिलाया और बचा हुआ दूध बाबा कमालू को दे दिया। बाबा कमालू ने कोढ़ियों के जूठे दूध को गीला समझकर उसे सूखे घड़े में डाल दिया। दूध डालते ही घड़ा हरा हो गया। बाबा कालू नाल ने बाबा कमालू से कहा, "आओ कमाल्या कमालू, तुमने यह क्या किया? मैंने सभी ऋद्धियाँ और सिद्धियाँ इसी दूध में घोलकर तुम्हें दी थीं।" बाबा कालू उस पर बहुत क्रोधित हुए और समाधि में लीन हो गए। बाबा कमालू दुखी होकर घर में ही रहने लगे और बाबा जी की सेवा करने लगे। एक दिन बाबा कालू नाल ने समाधि खोली और बाबा कालू से कहा कि दौड़कर माईसरखाना के श्मशान में जाओ। माता ज्वाला जी वहां एक कोढ़ी का रूप धारण करके आई हैं। इस बार कोई गलती मत करना। बाबा कमालू उसी समय माईसरखाना गाँव के श्मशान में पहुँचे और माता ज्वाला जी के चरण पकड़ लिए। माता जी ने बाबा कमालू से कहा मुझे वरदान मिला है कि मैं हर वर्ष माईसरखाना गाँव के मंदिर में दर्शन दूंगी। जो भी भक्त वहाँ आकर कोई भी सुख मांगेगा, उसकी सभी खुशियाँ पूरी होंगी। तभी से माईसरखाना का यह ऐतिहासिक मेला शुरू हो गया। यहाँ लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन दिन-रात दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं। इस बार भी ग्राम पंचायत ने आने वाले श्रद्धालुओं के आवास, पेयजल, प्रकाश व अन्य सुविधाओं की उचित व्यवस्था की है। श्री सनातन धर्म महावीर दल मंदिर और मालवा प्रांतीय ब्राह्मण सभा मंदिर की समितियों ने भी माता जी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अपनी ओर से उचित व्यवस्था की है।
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