ट्रंप प्रशासन की कड़ी वीजा नीति का असर: 85,000 वीजा रद्द, भारतीय H-1B आवेदकों को बढ़ी मुश्किलें
वॉशिंगटन (आरएनआई)। अमेरिका की इमीग्रेशन नीति पर ट्रंप प्रशासन का सख्त रूख लगातार जारी है। जनवरी 2025 से अब तक 85,000 से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं, जिसके चलते दुनियाभर के वीजा आवेदकों पर असर पड़ रहा है। वहीं नई सोशल मीडिया वेटिंग पॉलिसी के चलते विशेष रूप से भारत में H-1B वीजा आवेदकों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई आवेदकों के इंटरव्यू अब मार्च 2025 तक स्थगित कर दिए गए हैं।
अमेरिकी दूतावास के अनुसार, जिन लोगों की अपॉइंटमेंट रद्द की गई है, उन्हें नई तारीख प्रदान की जाएगी। दूतावास ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व निर्धारित इंटरव्यू तिथि पर बिना नई पुष्टि के पहुंचने पर किसी को प्रवेश नहीं मिलेगा। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दिसंबर के अंत तक होने वाली कई इंटरव्यू तिथियाँ आगे बढ़ा दी गई हैं, हालांकि स्थगित मामलों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
इमीग्रेशन मामलों के विशेषज्ञ स्टीवन ब्राउन ने बताया कि अब आवेदकों को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल सार्वजनिक करने होंगे ताकि अधिकारी उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की सुरक्षा जांच कर सकें। अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि हर वीजा निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इस नीति से संभावित खतरे पर रोक लगाई जा सकेगी।
H-1B प्रोग्राम पर पहले से ही बढ़ी निगरानी में यह नया कदम जुड़ गया है। इससे पूर्व, सितंबर में ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B वीजा पर एकमुश्त लगभग $1,00,000 अतिरिक्त शुल्क भी लागू किया था। साथ ही—ग्रीन कार्ड, नागरिकता आवेदन और कुछ विशेष देशों के इमीग्रेशन प्रसंस्करण पर भी रोक लगाई गई है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, रद्द किए गए वीजाओं में 8,000 से अधिक वीजा छात्रों के हैं, जिनमें DUI, चोरी और हिंसक अपराध जैसी वजहें प्रमुख रहीं। वहीं, कुछ विवादित घटनाओं के कारण भी वीजा रद्द किए गए—जैसे कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट चार्ली किर्क की हत्या पर कथित जश्न मनाने वालों और गाज़ा संघर्ष पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के मामले।
इसके अलावा, हाल ही में लागू नई मॉनिटरिंग प्रणाली के तहत अब अमेरिका सभी 5.5 करोड़ से ज्यादा वीजा धारकों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा, यानी वीजा मिलने के बाद भी निगरानी जारी रहेगी।
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन की यह नीति अमेरिका की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू की गई बताई जाती है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों और छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा गए हैं।
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