खैरा ने हरियाणा को एकतरफा पानी आवंटित करने के बीबीएमबी के अनुचित, अन्यायपूर्ण और नापाक कदम की कड़ी निंदा की; इसे पंजाब के संसाधनों की दिनदहाड़े लूट करार दिया गया
(सुरेश रहेजा,परवीन कुमार,चंद्र मोहन,साहिल रहेजा)
चंडीगढ़ (आरएनआई) कांग्रेस विधायक एवं अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब सरकार और पंजाब के लोगों के कड़े विरोध के बावजूद भाखड़ा बांध से हरियाणा को 8,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा की है। यह कदम पंजाब के जल अधिकारों पर सीधा हमला है और आगामी धान की बुवाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्य की कृषि जीवनरेखा को भी खतरे में डालता है।
पंजाब गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, भाखड़ा, पोंग और रंजीत सागर बांधों में जल स्तर पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। हरियाणा, जिसने चालू लेखा सत्र के लिए अपने आवंटित जल हिस्से का 104% पहले ही उपयोग कर लिया है, को अब बीबीएमबी के निर्णय द्वारा अनुचित प्राथमिकता दी जा रही है, जो कि “मानवीय आधार” के नाम पर लिया गया था।
यह पंजाब के वैध हिस्से की दिनदहाड़े लूट से कम नहीं है, जिसे भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और हरियाणा के राजनीतिक दबाव में अंजाम दिया गया है।
विवाद को बढ़ाते हुए, जल विनियमन निदेशक, पंजाब कैडर के अधिकारी आकाशदीप सिंह का स्थानांतरण तथा उनके स्थान पर हरियाणा कैडर के अधिकारी संजीव कुमार की नियुक्ति ने बीबीएमबी की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, आकाशदीप सिंह का स्थानांतरण उनके स्वयं के अनुरोध से जुड़ा हुआ था, जिसे उन्होंने सार्वजनिक रूप से अस्वीकार कर दिया था, जिससे उनकी चालाकीपूर्ण रणनीति उजागर हुई। पंजाब की चिंता इस तथ्य से और बढ़ जाती है कि संजीव कुमार को जल विनियमन का कोई अनुभव नहीं है, जैसा कि पंजाब के मुख्य अभियंता ने उजागर किया है।
सुखपाल सिंह खैरा ने कहा, ‘‘पंजाब के बेटे और यहां के लोगों के प्रतिनिधि के तौर पर मैं अपने किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हूं, जो अपनी आजीविका के लिए पानी की हर बूंद पर निर्भर हैं।’’
"बीबीएमबी का यह निर्णय न केवल नौकरशाही की ज्यादती है, बल्कि पंजाब के हितों को कमज़ोर करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। हम अपने राज्य को उसके उचित हिस्से से वंचित नहीं होने देंगे, खासकर तब जब हमारे खेत सूख रहे हैं और हमारे किसान संघर्ष कर रहे हैं।"
खैरा ने बीबीएमबी के फैसले को तुरंत वापस लेने और आकाशदीप सिंह के स्थानांतरण तथा अयोग्य अधिकारी की नियुक्ति की पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने पंजाब सरकार से राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सभी कानूनी रास्ते अपनाने तथा भविष्य में बीबीएमबी के सभी निर्णयों में पंजाब की आवाज को सुनने की अपील की।
उन्होंने कहा, "भाजपा और हरियाणा को पंजाब पर दबाव डालकर उसे अपने अधीन करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हमारा पानी हमारी जीवन रेखा है और हम इसे बचाने के लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।"
खैरा ने आगे कहा। “मैं सभी पंजाबियों से इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होने और हमारे किसानों और नेताओं के नेतृत्व में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करता हूं ताकि हमारे अधिकारों की रक्षा की जा सके।” पंजाब के लोग निष्पक्षता, पारदर्शिता और न्याय के हकदार हैं। सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब के हितों की रक्षा और भावी पीढ़ियों के लिए राज्य के जल संसाधनों को सुरक्षित रखने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।
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