पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे की रहस्यमय मौत पर उठे सवाल, सीबीआई जांच की मांग तेज
चंडीगढ़ (आरएनआई) — पंजाब के पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील अख्तर की संदिग्ध मृत्यु की जांच अब सीबीआई के पास सौंपे जाने की संभावना सामने आई है। हरियाणा सरकार ने इस संबंध में गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है और मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग की है।
अकील अख्तर (35) की 16 अक्तूबर की देर रात पंचकूला के सेक्टर-4 स्थित उनके घर में मौत हुई मिली थी। मामले को बढ़ाने वाली शिकायत 17 अक्तूबर को मलेरकोटला के मॉडल टाउन निवासी शमशुद्दीन द्वारा पंचकूला कमिश्नर को दी गई। शिकायत मिलते ही एमडीसी थाना, पंचकूला में पंजाब के पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा, उनकी पत्नी (पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना), मृतक की पत्नी व बहू के खिलाफ हत्या व आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
हरियाणा पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। SIT के प्रमुख एसीपी विक्रम नेहरा ने बताया कि प्राथमिक जांच का लक्ष्य अकील की मौत के वास्तविक कारण का निर्धारण करना है। उन्होंने कहा कि मृतक की मेडिकल हिस्ट्री, घटनास्थल से मिले सबूतों और अन्य सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। जांच के क्रम में पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा को भी समन भेजा गया था, लेकिन वे जांच में उपस्थित नहीं हुए।
मोहम्मद मुस्तफा ने अपने बेटे की मौत के बाद मीडिया में कहा है कि उन पर एक साजिश रची जा रही है और उनकी नियुक्ति व प्रतिष्ठा को धक्का पहुँचाने का प्रयत्न हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बेटा मानसिक रूप से अस्थिर था और पिछले 18 वर्षों से नशे व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा था। मुस्तफा ने दावा किया कि अकील के द्वारा आत्महत्या से पहले जारी एक वीडियो में जो आरोप लगाये गये हैं वे गलत हैं और उनके विरोधी उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन व पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्यों को संकलित कर पोस्टमार्टम व फोरेंसिक रिपोर्टों पर ध्यान केंद्रित किया है। जांच अभी जारी है और हरियाणा सरकार द्वारा भेजे गए पत्र के मद्देनजर यदि केंद्र सीबीआई को जांच सौंपने का निर्देश देता है तो मामले की जांच अब राष्ट्रीय संस्था के माध्यम से आगे बढ़ सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों व स्थानीय समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले में आरोपों की गंभीरता और पारिवारिक दावों के कारण निष्पक्ष, शीघ्र और व्यापक जांच आवश्यक है ताकि तथ्यों का स्पष्ट पता चल सके और न्याय सुनिश्चित हो।
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