कैद सिखों की रिहाई मार्च में गिरफ्तारियां लोकतंत्र के खिलाफ: एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी
अमृतसर (आरएनआई) कैद सिखों की रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली के गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब से अरदास करने के बाद पार्लियामेंट हाउस की ओर शांति से मार्च कर रहे नेशनल जस्टिस फ्रंट के नेताओं को गिरफ्तार करना बहुत बड़ा गलत है। यह बात शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रेसिडेंट एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पुलिस द्वारा सिख नेताओं की गिरफ्तारी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही।
एडवोकेट धामी ने कहा कि लगभग तीन दशकों से सिख समुदाय जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए लगातार आवाज उठाता आ रहा है, लेकिन सरकारों ने हमेशा सिख भावनाओं को नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि देश के संविधान के अनुसार हर नागरिक को अपनी जायज़ मांगों के लिए शांति से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन देश की राजधानी में सिखों से यह अधिकार भी छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरोध मार्च निकाल रहे नेशनल जस्टिस फ्रंट के नेताओं को ज़बरदस्ती गिरफ्तार करके अलग-अलग पुलिस थानों में बंद करना इंसाफ़ की आवाज़ को दबाने जैसा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इसकी कड़ी निंदा करती है।
उन्होंने कहा कि समुदाय पर हो रहे ज़ुल्म के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे जेल में बंद सिंहों ने कोर्ट की सज़ा से कहीं ज़्यादा समय जेल में बिताया है। इसी देश में जब सरकारें दूसरे धर्मों के लोगों की सज़ा कम करके उन्हें रिहा कर सकती हैं, तो सिखों के साथ नाइंसाफ़ी क्यों हो रही है? उन्होंने मांग की कि समुदाय की भावनाओं को समझते हुए सरकार भाई बलवंत सिंह राजोआना की सज़ा कम करने और भाई जगतार सिंह हवारा और दूसरे सिंहों को तुरंत रिहा करने का ऐलान करे।
उन्होंने विरोध मार्च निकाल रहे नेताओं को भी तुरंत रिहा करने को कहा।
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