आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: मां शैलपुत्री की आराधना से हुई आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ
नई दिल्ली (आरएनआई)। आज, 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को साधना, संकल्प और देवी उपासना का विशेष समय माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ होती है, जिसमें मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और नवदुर्गाओं में उनका पहला स्थान है। वे वृषभ पर विराजमान रहती हैं, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित रहता है। मां शैलपुत्री की आराधना से साधक के मूलाधार चक्र का जागरण होता है, जो जीवन में स्थिरता, संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा का आधार माना जाता है।
नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल को शुद्ध कर विधिपूर्वक कलश स्थापना करते हैं। इसके बाद मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर गंगाजल से शुद्धि की जाती है। रोली, अक्षत, पुष्प अर्पित किए जाते हैं और माता को सफेद वस्त्र, घी का दीपक तथा घी से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का जप करते हुए श्रद्धा भाव से आरती की जाती है और अंत में अपनी मनोकामनाएं मां के चरणों में अर्पित की जाती हैं।
मान्यता है कि मां शैलपुत्री की उपासना से व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से जिन लोगों का मन विचलित रहता है या आत्मविश्वास में कमी होती है, उनके लिए मां की आराधना अत्यंत फलदायी मानी गई है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा से मां शीघ्र प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।
चैत्र नवरात्रि के साथ ही देशभर के मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन शुरू हो गया है। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत, पूजा और साधना के माध्यम से मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
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