राहुल गांधी के खिलाफ FIR पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, आज हो सकता है निर्णय
कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ वाराणसी में मुकदमा दर्ज होगा या नहीं इस पर फैसला शुक्रवार को आ सकता है। तीन सितंबर को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था, फैसला आने तक स्पेशल कोर्ट वाराणसी के आदेश को स्थगित भी कर दिया है।
प्रयागराज (आरएनआई) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा या नहीं इस पर आज शुक्रवार को फैसला आ सकता है। पिछली सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। अब सबकी निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर पर टिकी हैं। यह मामला राहुल गांधी के अमेरिका में दिए गए एक बयान से जुड़ा है, जिस पर वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा ने आपत्ति उठाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की थी।
वाराणसी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी थी कि भाषण अमेरिका में दिया गया था, इसलिए मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लेकिन, सत्र/ पुनरीक्षण अदालत ने 21 जुलाई 2025 को इस आदेश को पलटते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट को पुनः सुनवाई करने का निर्देश दिया। इसी आदेश को राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तीन सितंबर को हाईकोर्ट में करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों की ओर से जोरदार बहस हुई थी। राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई कि वाराणसी अदालत का आदेश न केवल गलत है, बल्कि अधिकार क्षेत्र से बाहर भी है। वहीं, शिकायतकर्ता नागेश्वर मिश्रा ने कहा कि गांधी का बयान भड़काऊ और विभाजनकारी था।
यह मामला सितंबर 2024 का है। राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है, क्या सिख पगड़ी पहन सकते हैं, कड़ा रख सकते हैं और गुरुद्वारे जा सकते हैं? उनके इस बयान को भड़काऊ और समाज में विभाजनकारी बताते हुए विरोध हुआ था।
वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस बयान के खिलाफ सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) ने 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया कि मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है और यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की जिसे 21 जुलाई 2025 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) की अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अब इस फैसले के खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है। दलील दी गई है कि वाराणसी अदालत का आदेश गलत, अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लिहाजा जब तक यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है तब वाराणसी अदालत के आदेश पर रोक लगाई जाए।
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