राष्ट्रीय एकता ही देश की असली ताकत, विकास के लिए सामाजिक सद्भाव जरूरी – उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली (आरएनआई) — उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत की वास्तविक शक्ति राष्ट्रीय एकता और समाज की सामूहिक सेवा भावना में निहित है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज सेवा को अपना कर्तव्य मानें और हर परिस्थिति में देशहित को सर्वोपरि रखें। उपराष्ट्रपति अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के गणतंत्र दिवस परेड शिविर में शामिल युवाओं से संवाद कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जब देशवासी एकजुट होकर कार्य करते हैं, तभी राष्ट्र तेज़ी से प्रगति करता है। सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान नेताओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने देश को एकता और सेवा का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनके विचार भारत की निरंतर उन्नति के मार्गदर्शक हैं।
उपराष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल सरकार का अभियान नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा जिम्मेदारी है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हर नागरिक को अनुशासित, जिम्मेदार और राष्ट्रभक्त बनना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आज के युवा अपनी प्रतिभा, ऊर्जा, सपनों और वैश्विक अनुभव के बल पर भारत को 2047 तक विश्व के अग्रणी देशों में शामिल कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति से नहीं बनता। इसके लिए सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों की मजबूती और अच्छे संस्कार भी उतने ही आवश्यक हैं। ऐसी मूलभूत मान्यताओं को मजबूत करने में एनएसएस जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
एनएसएस स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे साक्षरता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, सामुदायिक विकास, आपदा राहत और पुनर्वास जैसे क्षेत्रों में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि निस्वार्थ सेवा से न केवल समाज सशक्त होता है, बल्कि व्यक्ति का चरित्र भी निखरता है, और यही सच्चे राष्ट्र निर्माण की पहचान है।
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