माघ मेला क्षेत्र से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बिना स्नान प्रस्थान
पत्रकार वार्ता में व्यक्त की गहरी व्यथा
प्रयागराज (आरएनआई) माघ मेले के पवित्र अवसर पर प्रयागराज पहुँचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने आज अचानक बिना त्रिवेणी संगम स्नान किए ही मेला क्षेत्र से प्रस्थान कर दिया। इस निर्णय ने न केवल अनुयायियों को आश्चर्यचकित किया, बल्कि पूरे धार्मिक समुदाय में चिंता और चर्चा का विषय भी बन गया।
प्रस्थान से पूर्व आयोजित पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य का स्वर भावुक और बोझिल दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि प्रयाग की इस पवित्र भूमि पर वे सदैव आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, किंतु इस बार जो घटनाएँ घटीं, उन्होंने उनके मन और आत्मा को गहरे तक आहत कर दिया।
उन्होंने कहा—“हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और हम न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं। प्रयाग से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना नहीं की थी।”
शंकराचार्य ने कहा कि संगम में स्नान मात्र धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शांति का माध्यम है, परंतु उत्पन्न परिस्थितियों ने उन्हें ऐसा मानसिक व्यथित कर दिया कि जल की शीतलता भी अर्थहीन प्रतीत होने लगी।
उन्होंने मीडिया के माध्यम से समाज और प्रशासन के लिए संदेश देते हुए कहा—“न्याय की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। हम यहाँ से जा रहे हैं, पर पीछे सत्य की गूँज और अनुत्तरित प्रश्न छोड़कर।”
अंत में उन्होंने अपने समर्थकों, श्रद्धालुओं और मीडिया कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापित किया और कुछ समय एकांत व शांति की आवश्यकता जताई, ताकि वे इस पीड़ा को आत्मसात कर सकें।
शंकराचार्य का यह निर्णय और बयान माघ मेले की पृष्ठभूमि में एक अहम और संवेदनशील अध्याय जोड़ गया है। मेला क्षेत्र में उपस्थित श्रद्धालुओं और संत समुदाय में इस घटना को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
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