नई दिल्ली (आरएनआई) देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भारत और फ्रांस के मजबूत होते संबंधों को वैश्विक अस्थिरता के दौर में बेहद अहम बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय सहयोग की पूरी संरचना को कमजोर कर सकता है और ऐसे समय में भारत-फ्रांस साझेदारी कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक “जीवनरेखा” के समान है।
भारत-फ्रांस कानूनी और व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब पारंपरिक कूटनीतिक दायरे से आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने रक्षा और सुरक्षा सहयोग, उन्नत प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान तथा रणनीतिक साझेदारी को इन रिश्तों की नई पहचान बताया।
मुख्य न्यायाधीश ने द्विपक्षीय व्यापार में आई तेजी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत और फ्रांस के बीच व्यापार दोगुने से अधिक बढ़ा है। वर्ष 2009-10 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 6.4 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो पिछले वित्तीय वर्ष में बढ़कर 15.11 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ता आर्थिक सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे होते विश्वास को दर्शाता है।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, लेकिन आज की अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में इनका महत्व और भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तंत्र के अस्थिर होने का खतरा है, ऐसे में समान विचारधारा वाले देशों के बीच मजबूत साझेदारी स्थिरता का आधार बन सकती है।
इस अवसर पर उन्होंने कानूनी सहयोग को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और फ्रांस के बीच एक संयुक्त मध्यस्थता और आर्बिट्रेशन पैनल की स्थापना की जानी चाहिए, जिसमें सिविल और कॉमन लॉ परंपराओं में प्रशिक्षित विशेषज्ञ शामिल हों। उनके अनुसार, ऐसा पैनल न केवल तकनीकी दक्षता लाएगा, बल्कि विवादों के समाधान में सांस्कृतिक और कानूनी समझ भी सुनिश्चित करेगा।
मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय आर्बिट्रेशन केंद्रों और पेरिस स्थित संस्थानों के बीच संस्थागत साझेदारी को और गहरा करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों के समाधान में सहयोग और भरोसा दोनों मजबूत होंगे।