भारतीय मूल की गजाला हाशमी बनीं वर्जीनिया की लेफ्टिनेंट गवर्नर, इस पद पर पहुंचने वाली पहली मुस्लिम और दक्षिण एशियाई महिला
वॉशिंगटन (आरएनआई)। भारतीय मूल की डेमोक्रेट नेता गजाला हाशमी ने अमेरिकी राज्य वर्जीनिया के इतिहास में नया अध्याय लिखा है। 61 वर्षीय हाशमी राज्य की पहली मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल की महिला हैं जिन्हें लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर चुना गया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन रीड को कड़े मुकाबले में हराया। मंगलवार को हुए चुनाव में यह जीत भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए गर्व का क्षण बन गई है।
गजाला हाशमी की यह उपलब्धि अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। वर्ष 2025 के चुनावों में अमेरिका में 30 से अधिक भारतीय-अमेरिकी और दक्षिण एशियाई उम्मीदवार विभिन्न अहम पदों के लिए चुनावी मैदान में हैं।
गजाला हाशमी लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा, लोकतंत्र की रक्षा, मतदान अधिकारों की सुरक्षा, बंदूक हिंसा की रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण, आवास और किफायती स्वास्थ्य सेवा जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। हाशमी सामाजिक न्याय और समावेशी मूल्यों की प्रबल समर्थक मानी जाती हैं।
उनकी जीत पर ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड’ ने बधाई देते हुए कहा कि यह न सिर्फ हाशमी की, बल्कि पूरे भारतीय-अमेरिकी समुदाय की ऐतिहासिक जीत है। संगठन ने बताया कि उसने हाशमी के चुनाव अभियान में 1.75 लाख डॉलर का निवेश किया था, ताकि मतदाताओं को जोड़कर सरकार के हर स्तर पर भारतीय मूल के लोगों का प्रतिनिधित्व मजबूत किया जा सके। संगठन के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने इस जीत को “समुदाय और लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण” बताया।
भारत से अमेरिका तक की प्रेरक यात्रा
गजाला हाशमी का परिवार तब भारत से अमेरिका आया था जब वह मात्र चार वर्ष की थीं। उनकी मां और बड़े भाई के साथ वे जॉर्जिया पहुंचीं, जहां उनके पिता इंटरनेशनल रिलेशन्स में पीएचडी कर रहे थे और एक शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू कर रहे थे। हाशमी ने स्कूली शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और उन्हें कई फुल स्कॉलरशिप और फेलोशिप मिलीं। उन्होंने जॉर्जिया सदर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ बीए और एमोरी यूनिवर्सिटी से अमेरिकन लिटरेचर में पीएचडी की डिग्री हासिल की।
साल 1991 में हाशमी ने अपने पति अजहर से विवाह किया और दोनों वर्जीनिया के रिचमंड में बस गए। उन्होंने करीब 30 साल तक यूनिवर्सिटी ऑफ रिचमंड और रेनॉल्ड्स कम्युनिटी कॉलेज में बतौर प्रोफेसर अध्यापन किया। वर्ष 2019 में वह पहली बार वर्जीनिया सीनेट के लिए चुनी गईं और तब से लगातार सक्रिय राजनीति में हैं।
गजाला हाशमी की ऐतिहासिक जीत ने न केवल अमेरिकी राजनीति में विविधता को सशक्त किया है, बल्कि भारतीय मूल के प्रवासी समुदाय के लिए भी गर्व और प्रेरणा का क्षण बनाया है।
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