भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता, दोनों देशों में 10 साल के सहयोग ढांचे पर बनी सहमति
वॉशिंगटन (आरएनआई) — भारत और अमेरिका के बीच 10 वर्षीय रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसे दोनों देशों के संबंधों के इतिहास में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है। इस समझौते पर हस्ताक्षर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के बीच कुआलालंपुर में हुए, जहां दोनों नेता आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में शामिल थे।
अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने समझौते के बाद सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में कहा कि भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध अब तक के सबसे मजबूत स्तर पर हैं। उन्होंने लिखा कि यह समझौता न केवल दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति को भी मजबूती प्रदान करेगा।
राजनाथ सिंह ने समझौते पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यह नया रक्षा ढांचा आने वाले दशक में सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता रक्षा प्रौद्योगिकी, साझा सैन्य अभ्यास, और आपसी रणनीतिक विश्वास को और गहरा करेगा।
इससे पहले अगस्त में राजनाथ सिंह की वाशिंगटन यात्रा प्रस्तावित थी, लेकिन उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर टैरिफ 25% से बढ़ाकर 50% किए जाने के कारण दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे, जिसके चलते यह यात्रा रद्द कर दी गई थी। अब इस समझौते के साथ दोनों देशों ने संबंध सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
हाल ही में अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख तेल निर्यातक कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल आयात में कटौती की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत-अमेरिका संबंधों के पुनर्निर्माण में एक सकारात्मक संकेत है। ट्रंप ने भी हाल में दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान कहा था कि वह भारत के साथ एक व्यापक व्यापार समझौता करने के इच्छुक हैं।
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच भी कुआलालंपुर में हाल ही में बैठक हुई थी, जिसमें दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
इस 10 वर्षीय रक्षा समझौते को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, सामरिक सहयोग और वैश्विक सुरक्षा में साझा दृष्टिकोण का प्रतीक माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता न केवल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका को एक दूसरे के और करीब लाएगा।
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