बारिश ने डुबोया लाखों का सामान, पर नहीं डिगा हौसला—कारीगरों ने फिर खड़ा किया रावण
नई दिल्ली (आरएनआई) राजधानी के तितारपुर, नंगली डेयरी, राजौरी गार्डन, रमेश नगर, ओखला, कालकाजी, शाहदरा, सीलमपुर और दिलशाद गार्डन समेत अन्य इलाकों में रावण दहन के लिए रावण को खरीददारी देखते ही बन रही थी। लेकिन बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। लेकिन रावण के विशाल पुतलों को अंतिम रूप देने के लिए कारीगर फिर से लगे हैं।
बीते तीन दिन से घर नहीं गया था, सोचा था कि मंगलवार को आराम से काम खत्म करने के बाद परिवार के साथ समय बीताऊंगा। लेकिन इंद्रदेव को कुछ और ही मंजूर था। कर्ज लेकर पुतलों को बनाने का काम शुरू किया। अब बारिश ने इतना नुकसान कर दिया है कि समझ नहीं आ रहा, कैसे परिवार का पेट पालूंगा। यह कहते हुए रावण का पुतला बना रहे कारीगर कृष्ण भावुक हो गए। कृष्ण ने कहा, पूरी लगन से रावण के पुतलों को अंतिम रूप देने में लगा हूं। बच्चों से भी बात नहीं की है। सोचा, अगर इस बार ना बना सका, तो कई लोगों का दशहरा अधूरा रह जाएगा...।
राजधानी के तितारपुर, नंगली डेयरी, राजौरी गार्डन, रमेश नगर, ओखला, कालकाजी, शाहदरा, सीलमपुर और दिलशाद गार्डन समेत अन्य इलाकों में रावण दहन के लिए रावण को खरीददारी देखते ही बन रही थी। लेकिन बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। लेकिन रावण के विशाल पुतलों को अंतिम रूप देने के लिए कारीगर फिर से लगे हैं। उन्होने न रोटी खाई, न नींद ली, बस दिन रात काम में लगे हैं।
तितारपुर में 45 वर्षीय कारीगर राजो और उनकी टीम ने बताया कि कई दिनों से अपनी पूरी ताकत झोंक दी। बीते मंगलवार को हुई बारिश में 50 में से 45 पुतले पुतले नष्ट हो गए थे। ऐसे में लाखों का नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ऐसे में उन्होंने ठाना कि हर बार की तरह पुतले समय पर तैयार होंगे। चाहे कुछ भी करना पड़े।
कारीगर ओमपाल ने बताया कि वो खुद 15 घंटे से भूखे हैं। इसका कारण लाखों का नुकसान और समय की कमी है। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी, दिन-रात एक कर दिया, ताकि रावण खड़ा हो सके। उन्होंने बताया कि सोचा था इस बार अच्छा व्यापार होगा, लेकिन मौसम और ऑर्डर की कमी ने सब चौपट कर दिया। वहीं, कारीगर दिलीप ने बताया कि कर्ज लेकर काम शुरू किया था। उम्मीद थी कि त्योहार तक घाटा भर जाएगा। लेकिन, बारिश ने मेहनत को गलियों में बहा दिया।
इस बार रावण के पुतलों पर ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित नारे लिखे हुए हैं। कारीगर महेंद्र पाल राय ने बताया रावण की विशाल मूंछों पर ऑपरेशन सिंदूर कामयाब, भारतीय सेना को सलाम जैसे कई तरह के कोटेशन लिखें हैं।
जलने से पहले रावण ठहाके लगाएगा और उसके आखों से आग बरसेगी। राजधानी की रामलीलाओं में इस बार दर्शकों को कुछ नया और बेहद आकर्षक देखने को मिलेगा। विजयदशमी पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों को जलाने के लिए इस बार हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। लालकिला मैदान में लवकुश रामलीला कमेटी ने हाईटेक पुतलों की खास तैयारी कराई है। यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों को मोबाइल फोन से दहन करने की व्यवस्था है। जैसे ही स्क्रीन पर टच किया जाएगा, पुतलों में बारी-बारी से आग लगेगी। पुतलों से जलने से पहले रोने और ठहाके मारने की आवाज भी निकलेगी, जिससे दर्शकों को मानो जीवंत दृश्य का अनुभव होगा।
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