बांकेबिहारी कॉरिडोर विरोध: खून से लिखी चिट्ठी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने सांसद हेमा मालिनी को घेरा, गोस्वामी समाज की महिलाओं का सड़क पर उग्र प्रदर्शन
मथुरा (आरएनआई) उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृन्दावन स्थित ठा. बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण का विरोध दिनोंदिन बढता ही जा रहा है। शुक्रवार को एक ओर जहां मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखे गए और दुकान-मकान में ताले लगा सैकड़ों महिला-पुरुष व बच्चे बाजारों में होकर प्रदर्शन करते देखे गए, वहीं भाजपा की जिलाध्यक्ष रहीं मधु शर्मा इस मसले पर सांसद हेमामालिनी को धिक्कारती नजर आईं।
तकरीबन साढे तीन सप्ताह से कॉरिडोर एवं न्यास गठन अध्यादेश का विरोध कर रहीं गोस्वामी समाज की महिलाओं की पीड़ा सुनने पहुंचीं पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मधु शर्मा को जब यह मालूम पड़ा कि उन महिलाओं ने आज दुखी होकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को अपने खून से पत्र लिखे हैं। वे बुरी तरह से सांसद एवं स्थानीय आधिकारियों पर बिफर पड़ीं।
उन्होंने बड़े ही तीखे शब्दों में कहा, 'मैं धिक्कार देती हूँ, ऐसी महिला सांसद को, जिनके होते हुए भी महिलाओं को अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखने पड़ें'।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सांसद रहते वर्ष 2015 में संसद में वक्तव्य का उद्धरण पेश करते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री (तब के सांसद) ने तब कहा था कि जो धार्मिक संस्थाएं हैं वे स्वतंत्र हैं - जिनमें उन्होंने बांकेबिहारी मंदिर और विंध्यांचल मंदिर का नाम लिया था - इनका अधिग्रहण नहीं किया जा सकता, नहीं किया जाना चाहिए'।
उन्होंने कहा, मैं तो यही जानना चाहती हूँ कि तो तब कोई गलती हुई थी, या फिर आज जो हो रहा है वह गलत है। उन्होंने ऐसा कहने के पीछे कोई सवाल उठाए जाने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि मैंने यह सब अपनी पार्टी से ही सीखा है, भाजपा सरकार से ही सीखा है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है।
उन्होंने आगे कहा, 'यही कहना चाहती हूँ कि गड़बड़ी हुई है, तो या तो 2015 में हुई है या फिर अब हो रही है। मैं मुख्यमंत्री जी का आह्वान करती हूं कि आइए, इनके (प्रदर्शनकारी गोस्वामी महिलाओं के) साथ बैठिए, बात करिए, समाधान आवश्य निकलेगा। बस, इनके उपर उन अधिकारियो को मत थोपिए, जो इन्हें यह तक नहीं बता रहे कि कहां से कहां तक की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा'।
उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि मेरा यह आह्वान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (जी) से न होकर संत-महंत-पीठाधीश्वर आदित्यनाथ (जी) से है। वे इन अधिकारियों या जन प्रतिनिधियों के भरोसे न रहकर यहां आएं, एकबार स्वयं इन गोस्वामी महिलाओं की पीड़ा को जानने का प्रयत्न करें।
इतना कहते हुए उन्होंने एक बार फिर इस प्रकरण पर सांसद की भी भूमिका गहरा रोष प्रकट किया और कहा, आप सभी जानते हैं कि जिस गोस्वामी समाज की महिलाएं कभी भी घर से बाहर गलियों और बाजारों में घूमती नहीं देखी जातीं, वे आज कॉरिडोर और कथित अधिग्रहण के विरोध बिहारी जी के मंदिर के सामने विरोध कर रही हैं। ऐसे किसी भी जन प्रतिनिधि को स्वयं इनके पास आकर इनका दुख-दर्द जानना चाहिए, न कि इन्हें किसी के पास जाकर फरियाद करनी पड़े।
इससे पूर्व गोस्वामी समाज की महिलाओं की अगुवाई में स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों व संत समाज सहित हर वर्ग के व्यक्ति ने दुकानों-मकानों में ताले डालकर बाजारों में होकर विशाल जुलूस निकाला और मंदिर अधिग्रहण व कॉरिडोर विरोधी नारे लगाए।
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