दिल्ली में शिक्षकों की महारैली 5 दिसंबर को, टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देशभर से जुटेंगे शिक्षक
नई दिल्ली (आरएनआई)। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को शिक्षण सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए अनिवार्य किए जाने के खिलाफ देशभर के शिक्षक अब दिल्ली में एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। नौ राज्यों के शिक्षक संगठनों से जुड़ा टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) ने 5 दिसंबर को राजधानी दिल्ली में महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। रैली का उद्देश्य 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कराने की मांग उठाना है।
टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि संगठन की हाल ही में दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में बैठक हुई थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया। पहले महारैली 21 नवंबर को जंतर मंतर पर प्रस्तावित थी, लेकिन नवंबर के अंत में सिख समाज के राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के चलते दिल्ली प्रशासन ने उस अवधि में किसी अन्य रैली की अनुमति निरस्त कर दी। इसके बाद अब शिक्षक संगठनों ने पांच दिसंबर को महारैली करने का निर्णय लिया है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि महारैली के लिए व्यापक स्तर पर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है और देशभर के लाखों शिक्षक इसमें शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि "हमारी मांग स्पष्ट है — 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा जाए। यह फैसला लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है।"
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में शिक्षण सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य बताया गया था। इसके विरोध में कई राज्यों के शिक्षक लामबंद हो गए हैं। टीएफआई के साथ-साथ अन्य शिक्षक संगठन भी नवंबर और दिसंबर में दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे।
अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 24 नवंबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की है। मोर्चा पदाधिकारियों के अनुसार, इस प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश से ही दो लाख से अधिक शिक्षक शामिल होंगे। वहीं, अटेवा संगठन 25 नवंबर को दिल्ली कूच करेगा, जिसमें पुरानी पेंशन बहाली के साथ-साथ टीईटी अनिवार्यता को लेकर भी आवाज उठाई जाएगी। इसके अलावा, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी 11 दिसंबर को जंतर मंतर पर धरना देने की घोषणा की है।
लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों से यह स्पष्ट है कि शिक्षक समुदाय टीईटी की अनिवार्यता को लेकर बेहद आक्रोशित है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है और इससे अनुभवी शिक्षकों का मनोबल टूट रहा है।
दिसंबर में होने वाली यह महारैली शिक्षकों के इस आंदोलन का निर्णायक चरण साबित हो सकती है, जहां देशभर से हजारों की संख्या में शिक्षक दिल्ली की सड़कों पर उतरकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।
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