त्रिवेणी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, दोपहर 12 बजे तक डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी
प्रयागराज (आरएनआई)। माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम नगरी प्रयागराज में आस्था का अद्भुत और विराट दृश्य देखने को मिला। अलसुबह से ही त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा और दोपहर 12 बजे तक लगभग डेढ़ करोड़ लोगों ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती भीड़ के बीच पूरा मेला क्षेत्र “हर-हर गंगे” और “जय गंगे माता” के जयघोष से गूंजता रहा।
माघी पूर्णिमा का स्नान विशेष रूप से कल्पवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे उनका अंतिम प्रमुख स्नान पर्व कहा जाता है। एक महीने तक संगम तट पर रहकर साधना और अनुष्ठान करने वाले कल्पवासी आज स्नान के बाद अपने-अपने घरों की ओर प्रस्थान करने लगे। मेला क्षेत्र में जगह-जगह भगवान सत्यनारायण की कथा, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान होते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। संगम घाटों पर एटीएस सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां तैनात रहीं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की गई। मेला प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष योजना लागू की। मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि रात 12 बजे से ही स्नान शुरू हो गया था और सुबह 8 बजे तक करीब 90 लाख लोग स्नान कर चुके थे। उन्होंने कहा कि खोया-पाया केंद्र पूरी तरह सक्रिय हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए मानव श्रृंखला बनाकर श्रद्धालुओं को यमुना तट की ओर भी मोड़ा गया, जिससे दबाव कम किया जा सके।
धार्मिक संतों और श्रद्धालुओं ने भी व्यवस्थाओं की सराहना की। जगद्गुरु स्वामी नरेंद्र नंद ने कहा कि माघी पूर्णिमा पर त्रिवेणी में स्नान करने से जीवन में पवित्रता आती है और नकारात्मक प्रवृत्तियों का नाश होता है। उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों को अपनाने से विश्व में शांति और सद्भाव स्थापित हो सकता है। वहीं श्रद्धालु एच.आर. मिश्रा ने बताया कि उन्हें यहां की व्यवस्थाएं संतोषजनक लगीं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार भी साथ है और पिछले वर्ष की तरह इस बार भी उन्होंने संगम स्नान का सौभाग्य प्राप्त किया।
माघ पूर्णिमा के इस पुण्य अवसर पर प्रयागराज एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना नजर आया, जहां करोड़ों लोगों ने संगम में डुबकी लगाकर अपने जीवन को धन्य माना।
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