केंद्र के नए लेबर कोड का केरल करेगा विरोध, श्रम मंत्री बोले—मजदूर हितों से समझौता नहीं
तिरुवनंतपुरम (आरएनआई) — केंद्रीय श्रम कानूनों को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद और गहराते नजर आ रहे हैं। केरल सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह श्रमिक अधिकारों के खिलाफ किसी भी नीति को स्वीकार नहीं करेगी और केंद्र के नए लेबर कोड का विरोध जारी रखेगी।
राज्य के श्रम मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए श्रम कोड मजदूरों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि केरल सरकार इन प्रावधानों को रद्द कराने के लिए हरसंभव संवैधानिक और राजनीतिक प्रयास करेगी।
यह मुद्दा सदन में सीपीआई(एम) विधायक पी. नंदकुमार ने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नए श्रम नियम नौकरी की सुरक्षा को कमजोर करते हैं और वेतन व सेवा शर्तों से जुड़े श्रमिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री शिवनकुट्टी ने कहा कि राज्य सरकार मजदूर विरोधी किसी भी कदम को स्वीकार नहीं करेगी और श्रमिक हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता है।
मंत्री ने याद दिलाया कि राज्य सरकार पहले ही एक समिति गठित करने की घोषणा कर चुकी है, जो नए श्रम कोड का अध्ययन करेगी, उनके श्रमिकों पर संभावित प्रभाव का आकलन करेगी और आवश्यक सुधारात्मक सुझाव देगी। उनका कहना है कि 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए चार नए श्रम कोड कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता देते हैं और कई मामलों में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
शिवनकुट्टी ने यह भी दावा किया कि जहां कई राज्यों ने केंद्र के श्रम कोड के अनुरूप अपने कानूनों में बदलाव शुरू कर दिए हैं, वहीं केरल ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि वह मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाला कोई संशोधन लागू नहीं करेगा। राज्य सरकार का कहना है कि श्रमिक सुरक्षा, वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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