असम की मतदाता सूची पर विपक्ष की चुनाव आयोग से अपील, फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर जताई चिंता
गुवाहाटी (आरएनआई)। असम में चल रहे विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने की अपील की है। विपक्ष का कहना है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी भी सूरत में राजनीतिक हथियार की तरह नहीं होना चाहिए और किसी भी योग्य नागरिक को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
वामपंथी दलों—सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और एसयूसीआई(सी)—ने संयुक्त बयान जारी कर आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका दावा है कि कई पूरी तरह योग्य मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दाखिल की जा रही हैं, जिनमें खासतौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। दलों ने आरोप लगाया कि यह काम कथित रूप से “भाजपा एजेंटों” द्वारा कराया जा रहा है, ताकि वास्तविक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकें।
फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जाता है। इसे स्थायी रूप से स्थान परिवर्तन, किसी अन्य क्षेत्र में पहले से नाम दर्ज होने या भारतीय नागरिक न होने जैसी स्थितियों में भरा जा सकता है। इसके अलावा, कोई मतदाता अपने क्षेत्र के किसी अन्य व्यक्ति के नाम को हटाने के लिए भी आवेदन कर सकता है, बशर्ते कारण वैध हों, जैसे मृत्यु, आयु 18 वर्ष से कम होना या नागरिकता से जुड़ा मामला। नियमों के अनुसार, नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।
वाम दलों का आरोप है कि कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम से सैकड़ों शिकायतें दर्ज की गई हैं। कुछ कथित शिकायतकर्ताओं ने खुद कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। दलों ने यह भी दावा किया कि कई जीवित लोगों को “मृत” बताकर उनके नाम काटने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि कई बूथ लेवल अधिकारियों ने भी दबाव की शिकायत की है। साथ ही, प्रभावित लोगों को सुनवाई के लिए बहुत कम समय दिया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
इसी मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-7 एक साथ दाखिल किए जा रहे हैं और कई मामलों में शिकायतकर्ता या तो उपलब्ध नहीं है या शिकायत से इनकार कर रहा है। उन्होंने कछार जिले के बोरखोला विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि एक बूथ लेवल एजेंट ने 22 आपत्तियां दाखिल कीं, जो पूरी तरह झूठी थीं। सुष्मिता देव ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हजारों आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई कर निर्धारित समयसीमा में निपटारा करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। इसलिए उन्होंने सुनवाई की अंतिम तिथि बढ़ाने और हर मतदाता को अपने अधिकार की रक्षा का पूरा अवसर देने की मांग की। साथ ही, उन्होंने यह भी आग्रह किया कि जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल हैं, उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में भी सुनिश्चित किए जाएं।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, असम की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित की जानी है। विपक्षी दलों ने आयोग से मांग की है कि फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर सख्त निगरानी रखी जाए और फर्जी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे।
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