अमेरिका की नई एच-1बी वीजा नीति: ‘आओ, प्रशिक्षित करो और लौट जाओ’ रणनीति लागू करने की तैयारी
वॉशिंगटन (आरएनआई)।अमेरिका में ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा नीति में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। नई रणनीति के तहत अब विदेशी कुशल कामगारों को तीन, पांच या सात साल के लिए अमेरिका बुलाया जाएगा, ताकि वे अमेरिकी कामगारों को उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर सकें। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन विदेशी विशेषज्ञों को अपने देश लौटना होगा। प्रशासन ने इस नीति को ‘नॉलेज ट्रांसफर’ (ज्ञान हस्तांतरण) रणनीति का नाम दिया है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वे अमेरिका के महत्वपूर्ण उद्योगों — जैसे सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग — को फिर से देश के भीतर स्थापित करना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह रणनीति आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योगों को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
बेसेंट ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, “राष्ट्रपति की सोच यह है कि विदेशी विशेषज्ञों को सीमित अवधि के लिए अमेरिका लाया जाए ताकि वे यहां के कामगारों को प्रशिक्षित करें। उसके बाद वे लौट जाएं और अमेरिकी कामगार उनकी जगह संभालें। यही असली जीत होगी।”
उन्होंने माना कि बीते 20-30 वर्षों में अमेरिका ने प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग और शिपबिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रियता खो दी है। ऐसे में अचानक इन उद्योगों को खड़ा करना आसान नहीं है। “हमें कुशल विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत है जो हमारे लोगों को सिखा सकें,” उन्होंने कहा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इससे अमेरिकी नौकरियों पर असर पड़ेगा, तो बेसेंट ने साफ किया कि इसका उद्देश्य नौकरियां छीनना नहीं, बल्कि अमेरिकी कामगारों को तैयार करना है। “यह कहना गलत होगा कि एक अमेरिकी उस नौकरी को नहीं पा सकता — सच यह है कि, अभी नहीं पा सकता। हमें उन्हें तैयार करना होगा, और इसमें विदेशी विशेषज्ञ मदद करेंगे,” उन्होंने स्पष्ट किया।
इस बातचीत में बेसेंट ने ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि सरकार $100,000 से कम आय वाले परिवारों को $2,000 की टैरिफ छूट देने की योजना बना रही है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति चाहते हैं कि सशक्त व्यापार नीति का लाभ हर अमेरिकी परिवार तक पहुंचे।
बेसेंट ने कहा, “ट्रंप प्रशासन की दृष्टि समान समृद्धि की है। इसके लिए जरूरी है कि अमेरिकी ट्रेजरी मार्केट स्थिर और मजबूत रहे, ताकि अर्थव्यवस्था में लोगों का भरोसा बना रहे।”
नई एच-1बी नीति के तहत, अमेरिका वैश्विक प्रतिभाओं से सीखेगा, ताकि भविष्य में अपने दम पर तकनीकी नेतृत्व कायम रख सके — यह रणनीति ‘ज्ञान हस्तांतरण’ के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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