UPCA के भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने की शुरुआत, 13 अधिकारियों को ऐतिहासिक नोटिस जारी
नई दिल्ली (आरएनआई) उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (UPCA) के कथित भ्रष्टाचार और मनमाने प्रशासन के विरुद्ध चल रही लंबी लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बीसीसीआई के ऑम्बुड्समैन और न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने UPCA के 13 शीर्ष पदाधिकारियों को एक ऐतिहासिक शो कॉज नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से संघ के भीतर छुपी कमियाँ, गड़बड़ियाँ और कथित अनियमितताएँ अब सार्वजनिक रूप से सामने आएंगी।
यह नोटिस उपेंद्र यादव की शिकायत के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें पदाधिकारियों पर कार्यकाल सीमा और आयु सीमा के उल्लंघन सहित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि संघ के भीतर वर्षों से सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है और नियमों को ताक पर रखकर पदों से चिपके रहने की प्रवृत्ति ने तंत्र को खोखला कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से UPCA के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही थी, लेकिन कथित तौर पर कई बार प्रभावशाली हस्तियों के दबाव में मामला दबा दिया जाता था। राजीव शुक्ला जैसे सीनियर नेताओं का प्रभाव भी अक्सर चर्चा में रहा है। हालांकि अब कहा जा रहा है कि "अति सर्वत्र वर्जित"—और अब न्याय की उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है।
ऑम्बुड्समैन का यह कदम UPCA के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 13 पदाधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए केवल चार सप्ताह का समय दिया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह मामला अब निर्णायक मोड़ पर है और दोषियों की भूमिका स्पष्ट होने के साथ सख्त कार्रवाई संभव है।
क्रिकेट प्रेमियों और खिलाड़ियों के बीच इस कदम से उत्साह है। लंबे संघर्ष के बाद अब उन्हें विश्वास है कि उत्तर प्रदेश में क्रिकेट प्रशासन पारदर्शिता की ओर बढ़ेगा और वास्तविक हितधारकों को न्याय और अधिकार मिलेंगे।
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