2026 की पहली एमपीसी में रेपो रेट स्थिर, आरबीआई गवर्नर बोले—भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और संतुलित
नई दिल्ली (आरएनआई)। भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2026 की पहली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। तीन दिनों तक चली बैठक के बाद 6 फरवरी 2026 को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि एमपीसी ने बहुमत से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। साथ ही नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा गया है।
यह समीक्षा केंद्रीय बजट 2026 और हाल ही में हुए भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के बाद पहली नीतिगत बैठक थी, जिस पर बाजार और आर्थिक जगत की खास नजर थी। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था का समग्र प्रदर्शन बेहतर बना हुआ है और विकास व मुद्रास्फीति दोनों के मोर्चे पर स्थिति संतुलित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की मौद्रिक नीति संशोधित शृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति आंकड़ों के अनुरूप तय की जाएगी।
गवर्नर ने याद दिलाया कि वर्ष 2025 में रिजर्व बैंक ने विकास को समर्थन देने के लिए उदार मौद्रिक नीति अपनाई थी। उस दौरान रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई थी, जिससे दिसंबर 2025 में रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था।
2026 की पहली एमपीसी के बाद मांग और खपत पर बोलते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कॉरपोरेट क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और अनौपचारिक क्षेत्र में निरंतर गतिविधियों से विनिर्माण को गति मिलेगी। ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरी खपत में आगे और सुधार की संभावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में संपन्न भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार सौदा निर्यात को मजबूत समर्थन देंगे, जिससे आने वाले समय में आर्थिक वृद्धि को और बल मिलने की उम्मीद है।
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