‘100 मिलियन डॉलर के भ्रष्टाचार की जांच से संचालन पर नहीं पड़ा असर’, यूक्रेन की परमाणु ऊर्जा कंपनी का दावा
कीव (आरएनआई)। यूक्रेन की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी एनरगोएटम ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि देश के बिजली क्षेत्र में चल रही 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के कथित भ्रष्टाचार की जांच से उसके संचालन या बिजली उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी ने कहा कि राष्ट्रीय भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एनएबीयू) की जांच के बावजूद उत्पादन और संचालन सुरक्षा सामान्य रूप से जारी है।
एनरगोएटम ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब एनएबीयू ने ऊर्जा क्षेत्र में चल रही 15 महीने लंबी जांच से जुड़ी कुछ जानकारियां सार्वजनिक की थीं, जिनमें कंपनी का नाम भी शामिल था। यह जांच उस समय और अधिक संवेदनशील हो गई है जब रूस के लगातार हवाई हमलों ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को बार-बार नुकसान पहुंचाया है। लगातार हो रहे हमलों के कारण मरम्मत कार्यों में यूक्रेनी और विदेशी फंड की बड़ी मात्रा प्रवाहित हुई है।
यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, सोमवार रात रूस ने खारकीव, ओडेसा और दोनेत्स्क क्षेत्रों में ऊर्जा संरचनाओं पर हमले किए, जिसके बाद देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती लागू करनी पड़ी।
राष्ट्रीय भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एनएबीयू) का मुख्य कार्य उच्च स्तर के भ्रष्टाचार को खत्म करना है, जिसे कीव के यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने के प्रयासों की राह में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। यह एजेंसी खास तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी कंपनियों से जुड़े मामलों की जांच करती है।
इससे पहले ब्यूरो ने खुलासा किया था कि रक्षा क्षेत्र में फर्जी सौदों के जरिये लाखों डॉलर की हेराफेरी की गई थी, जो यूक्रेनी सेना के लिए मोर्टार शेल खरीदने हेतु आवंटित राशि से जुड़ी थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस नई जांच का स्वागत करते हुए कहा कि “भ्रष्टाचार के खिलाफ हर प्रभावी कदम बेहद जरूरी है।” उन्होंने सरकारी अधिकारियों से जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने की अपील की।
जेलेंस्की खुद भी भ्रष्टाचार से जुड़े जन असंतोष का सामना कर चुके हैं। पिछले महीने उन्हें एक विवादित कानून वापस लेना पड़ा था, जो भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं की स्वतंत्रता को सीमित करता था। यह निर्णय उन्होंने देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों और यूरोपीय संघ के दबाव के बाद लिया।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि एनरगोएटम के कुछ आपूर्तिकर्ताओं को कंपनी के साथ अनुबंध जारी रखने के लिए 10 से 15 प्रतिशत रिश्वत देनी पड़ती थी। साथ ही, यह भी संदेह है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भर्ती, खरीद प्रक्रिया और वित्तीय संसाधनों के प्रवाह पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क चलाया।
इसी बीच रूस की खुफिया एजेंसी एफएसबी ने दावा किया कि उसने यूक्रेनी जासूसों की एक साजिश को नाकाम किया है, जिसमें रूसी पायलटों को भर्ती कर एक मिग-31 लड़ाकू विमान हाइजैक करने की योजना थी। एफएसबी का कहना है कि यह विमान किंझाल हाइपरसोनिक मिसाइल से लैस था। हालांकि एजेंसी ने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया, और यूक्रेनी अधिकारियों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
यूक्रेन की जनरल स्टाफ ने दावा किया कि उसकी सेना ने रूस के सारातोव तेल रिफाइनरी पर हमला किया, जिससे वहां “भीषण आग” लग गई। यह पिछले कुछ महीनों में इस तरह का पांचवां बड़ा हमला बताया गया है।
इस पूरी स्थिति ने न केवल यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि युद्धकाल में भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर वैश्विक निगाहें भी केंद्रित कर दी हैं।
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