संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन पर जोर, विजेंद्र गुप्ता बोले- यह राष्ट्र के भविष्य में निवेश

Jul 10, 2026 - 20:17
Jul 10, 2026 - 20:17
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संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन पर जोर, विजेंद्र गुप्ता बोले- यह राष्ट्र के भविष्य में निवेश

नई दिल्ली(आरएनआई) दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आज कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा ही नहीं बल्कि यह भारत की सभ्यतागत चेतना और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत आधारशिला है और इसके संरक्षण और संवर्धन का प्रत्येक प्रयास हमारे राष्ट्र के भविष्य में किया गया एक निवेश है।

श्री गुप्ता यहां विधानसभा परिसर में संस्कृत महाकाव्य "मंगल महर्षि चरितम्" के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर संस्कृत के विद्वान, विशिष्ट अतिथि, दिल्ली विधानसभा के अधिकारीगण तथा साहित्य जगत से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।इस महाकाव्य का संपादन संस्कृत एवं हिंदी के विद्वान परशुराम शर्मा ने किया है। 

श्री गुप्ता ने संस्कृत की शाश्वत प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं सुव्यवस्थित भाषाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत की तार्किक व्याकरणिक संरचना आधुनिक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाओं से उल्लेखनीय समानता रखती है, जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रौद्योगिकी के वर्तमान युग में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

भारत की समृद्ध भाषाई परंपरा का उल्लेख करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि मलयालम सहित अनेक भारतीय भाषाएँ संस्कृत से व्यापक रूप से प्रभावित रही हैं, जो भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा पर संस्कृत के गहरे प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने संस्कृत के अध्ययन एवं व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह भाषा आज भी बौद्धिक चिंतन को प्रेरित करती है।

श्री गुप्ता ने संस्कृत को विश्व की सबसे प्राचीन भाषा तथा मानव ज्ञान की सबसे समृद्ध धरोहरों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, अर्थशास्त्र, ज्योतिष तथा अन्य शास्त्रीय ग्रंथों ने भारत की बौद्धिक, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को आकार दिया, जिसके कारण भारत को विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक शासन के लंबे कालखंड के बावजूद भारत के ऋषियों, मनीषियों एवं विद्वानों ने अपने समर्पण और अथक प्रयासों से देश की कालजयी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को सुरक्षित रखा।एल. एस.

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