शुभ योग में शरद पूर्णिमा
नई दिल्ली (आरएनआई) अश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह साल की सभी पूर्णिमाओं में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मां लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। वर्ष 2025 में शरद पूर्णिमा 6 अक्तूबर, सोमवार को पड़ रही है।
शरद पूर्णिमा पर किए जाने योग्य कार्य:
मां लक्ष्मी, चंद्र देव और भगवान कुबेर की पूजा करें।
चावल की खीर बनाकर रातभर चांदनी में रखें और प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
पूर्ण चंद्रमा के प्रकाश में चांदी के बर्तन में दूध अर्पित करें।
हनुमानजी के सामने चौमुखा दीपक जलाएं।
पीपल वृक्ष की पूजा कर जल और मीठा अर्पित करें।
चंद्र ग्रहण दोष निवारण के लिए दान और नदी में नारियल प्रवाहित करें।
विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में इत्र और अगरबत्ती अर्पित करें।
राधा-कृष्ण, भोलेनाथ-पार्वती, कार्तिकेय और गणेश पूजन करें।
शरद पूर्णिमा व्रत कथा सुनें।
माता लक्ष्मी की आरती के बाद कनक धारा स्त्रोत का पाठ करें।
इस दिन बचें इन बातों से:
तामसिक भोजन, मांस, लहसुन-प्याज, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन न करें।
क्रोध और अत्यधिक भावनाओं में बहने से बचें।
धन का लेन-देन न करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
सूर्यास्त के बाद दान न करें।
काले वस्त्र न पहनें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
जल की स्वच्छता और बालों में कंघी पर ध्यान दें।
बासी या ठंडा भोजन न करें।
धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों को अपनाकर भक्त शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी और चंद्र देव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा लाने में सफल हो सकते हैं।
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