राहुल गांधी का ओम बिरला को पत्र: सरकार के दबाव में बोलने से रोका गया, यह लोकतंत्र पर काला धब्बा
नई दिल्ली (आरएनआई)। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोके जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि उन्हें बोलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है तथा यह राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम विषय पर चर्चा को दबाने का प्रयास है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जब वे बोल रहे थे, तब उनसे जिस दस्तावेज़ का हवाला दिया जाना था, उसकी प्रमाणिकता सत्यापित करने को कहा गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अगली ही सुबह अपने भाषण की शुरुआत में उस दस्तावेज़ को विधिवत प्रमाणित कर दिया था। संसदीय परंपरा के अनुसार, दस्तावेज़ के सत्यापन के बाद सदस्य को उसका हवाला देने की अनुमति दी जाती है और इसके बाद सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उस पर जवाब दे। इसके बावजूद उन्हें बोलने से रोक दिया गया, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है।
पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें लोकसभा में बोलने से रोकना केवल परंपरा का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर लोकतांत्रिक चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख विषय था और संसद में इस पर चर्चा होना बेहद आवश्यक है, लेकिन उन्हें जानबूझकर इस विषय पर अपनी बात रखने से वंचित किया गया।
राहुल गांधी ने स्पीकर को यह भी याद दिलाया कि संसद के सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता सहित हर सांसद को बोलने का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार के इशारे पर स्पीकर ने विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोका। राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र पर काला धब्बा बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
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