जैसलमेर बस हादसा: 20 मौतें, 15 से अधिक घायल; पीएम ने राहत कोष से मदद की घोषणा
जैसलमेर (आरएनआई)। राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे एक चलती एसी स्लीपर बस में आग लगने से 20 यात्रियों की मौत हो गई और 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के वक्त बस में लगभग 40 यात्री सवार थे।
मृतकों में एक ही परिवार के 5 सदस्य शामिल हैं।
घायलों को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जोधपुर ले जाया गया, लगभग 275 किलोमीटर की यात्रा में सेना, पुलिस और प्रशासन ने मदद की।
हादसे के शिकार एक युवक आशीष दवे अपनी मंगेतर के साथ प्री-वेडिंग शूट से लौट रहे थे। दोनों आगे बैठे होने के कारण सुरक्षित बाहर निकल पाए, लेकिन आशीष की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है।
हादसे के दौरान बस मॉडिफाइड थी और उसमें इमरजेंसी एग्जिट गेट या विंडो हैमर जैसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
हादसे की संभावित वजह
शुरू में शॉर्ट सर्किट और एसी के कम्प्रेशर फटने की बातें सामने आईं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि बस की डिक्की में पटाखे रखे थे, जिससे धमाका और आग फैलने की संभावना है।
एंबुलेंस और राहत कार्य पर सवाल
घायलों के परिजन एंबुलेंस की हालत पर नाराज हैं।
आरोप है कि एंबुलेंस में डीजल भरवाना, ओटीपी का इंतजार, धीमी रफ्तार और लाइट नहीं होना जैसे कारणों से समय पर अस्पताल पहुंचना मुश्किल हुआ।
परिजनों ने एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की मांग की है।
बस और अनुमति की जानकारी
हादसे की बस केके ट्रैवल्स की थी, जो 1 अक्टूबर 2025 को रजिस्टर्ड हुई थी और 9 अक्टूबर को ऑल इंडिया परमिट मिला था।
बस केवल चौथे फेरे पर थी।
राहत और मदद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
पीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि "जैसलमेर हादसे से मन व्यथित है।"
पोस्टमार्टम और पहचान
मृतकों की पहचान के लिए दो निकटतम परिजनों से DNA सैंपल लिए जा रहे हैं।
हादसे में कई शव इतने गंभीर रूप से जल गए कि कुछ की पहचान मुश्किल हो रही है।
यह हादसा न केवल सड़क सुरक्षा और बस मॉडिफिकेशन की कमी को उजागर करता है, बल्कि आपातकालीन व्यवस्थाओं की कमजोरी पर भी सवाल उठाता है।
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