जातिगत जनगणना दूसरे चरण में होगी, सवाल पहले होंगे अधिसूचित, सरकार ने संसद में दी जानकारी
नई दिल्ली (आरएनआई)। केंद्र सरकार ने संसद को जानकारी दी है कि जनगणना 2027 के दौरान जातिगत जनगणना दूसरे चरण में कराई जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि जाति से जुड़े सवालों सहित सभी प्रश्न दूसरे चरण की शुरुआत से पहले विधिवत अधिसूचित किए जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होगी और नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जाएगा। जनगणना के लिए ₹11,718 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
बुधवार को राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि जनगणना 2027 कराने की केंद्र सरकार की मंशा पहले ही अधिसूचित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जनगणना दो चरणों में संपन्न होती है, जिसमें पहला चरण हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन होता है और दूसरा चरण पॉपुलेशन एन्यूमरेशन का होता है। जातिगत गणना दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना के दौरान कराई जाएगी, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विवरण एकत्र किए जाते हैं।
मंत्री ने बताया कि पहले चरण के प्रश्न 22 जनवरी को ही अधिसूचित किए जा चुके हैं, जबकि दूसरे चरण के प्रश्नों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम रूप देकर चरण शुरू होने से पहले अधिसूचित किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जातिगत जनगणना को लेकर तमिलनाडु सहित कई राज्यों और संगठनों से केंद्र सरकार को सुझाव और प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए हैं।
सरकार के अनुसार, जनगणना की यह व्यापक प्रक्रिया देशभर में लगभग 30 लाख गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों तथा करीब 1.3 लाख जनगणना अधिकारियों द्वारा संचालित की जाएगी। सभी को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए मोबाइल एप्स, सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम और स्व-गणना पोर्टल विकसित किए जा चुके हैं। डेटा संग्रह और प्रसारण के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
नित्यानंद राय ने बताया कि मोबाइल एप्स में ऑफलाइन डेटा संग्रह की सुविधा होगी और केवल विशेष परिस्थितियों में ही कागजी फॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जिसे बाद में डिजिटल रूप में दर्ज किया जाएगा। गणनाकर्ता घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे, ताकि किसी भी व्यक्ति या वर्ग का बहिष्करण न हो। स्व-गणना का विकल्प अतिरिक्त सुविधा के रूप में उपलब्ध रहेगा, जो हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले दिया जाएगा। हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तय 30 दिनों की अवधि में 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच कराया जाएगा।
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