हरदोई में शांति शिक्षा कार्यक्रम का भव्य समापन, विधायक रानू ने की डॉ. प्रेम रावत के शांति संदेश की मुक्तकंठ से प्रशंसा
हरदोई (आरएनआई) सवायजपुर के सदुल्लीपुर के पास हाईवे पर चल रहे शांति शिक्षा कार्यक्रम के अंतिम दिन विश्व शांति दूत एवं विश्व शांति शिक्षा कार्यक्रम के संस्थापक लेखक डॉक्टर प्रेम रावत जी ने कहा कि मनुष्य जिस शांति की खोज बाहर करता है वह शांति उसके हृदय में ही मौजूद है उन्होंने कहा घट घट में है सूझे नहीं लानत ऐसी जिंद तुलसी इस संसार को भयो मोतियाबिंद घट घट मोरा साइयां सुनी सेज न कोई बलिहारी वह घटकी जगत प्रगट होए।
समापन अवसर पर लगभग पांच हजार लोगो ने बाल एलईडी के माध्यम से प्रेम रावत जी के शांति सन्देश को सुना । समापन वाले दिन उमड़ा जन सैलाब कुंभ मेला का एहसास कर रहा था समापन अवसर पर कार्यक्रम में भाग लेने लखनऊ से चलकर पहुंचे विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू भैया का तिलक और पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया इस दौरान स्वामी दयाल ब्रजराज और आरेंद्र कुशवाहा के द्वारा उन्हे शाल उढ़ाकर स्मृति चिन्ह भेंट किया गया साथ ही डॉ प्रेम रावत जी द्वारा लिखित गिनीज वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड मे दर्ज पुस्तक स्वांस भेंट की गई । कार्यक्रम में विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू भैया ने कार्यक्रम मे बताया 2009 मे जिले के मोना मे हुए लाइव कार्यक्रम उन्होंने डॉक्टर प्रेम रावत जी को सुना था उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों में शांति के लिए नए आयाम स्थापित करते हैं उन्होंने इस कार्यक्रम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और हर संभव सहयोग का वादा किया कार्यक्रम में सवायजपुर तहसील क्षेत्र के आस पास के लगभग सभी गांव के स्थानीय लोग मौजूद थे।
यह कार्यक्रम न्यू वेंचर प्रेमरावत.डॉट.कॉम टीम के द्वारा आयोजित किया गया था विश्व शांति राजदूत वेस्टसेलिंग लेखक डॉक्टर श्री प्रेम रावत जी के मानवता एवं शांति संदेश का कार्यक्रम डे- नाइट एलईडी स्क्रीन के माध्यम से आठ दिवसीय कार्यक्रम का आज समापन हुआ। इस मौक़े पर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू भैया ने वरिष्ठ पत्रकार पीके गुप्ता के अनुरोध पर विहार से आये भजन गायक अरविन्द और आनंद की टीम का शाल उढाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया आपको बताते चले कि यह शांति शिक्षा कार्यक्रम 27 दिसंबर से शुरू हुआ और 4 जनवरी को समापन हुआ इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय शांति के राजदूत एवं शांति शिक्षा कार्यक्रम के संस्थापक वेस्टसेलिंग लेखक प्रेम रावत जी ने अपने वीडियो कार्यक्रम कहा – जब हम मन के शोर को शांत करते हैं तब हृदय की आवाज सुनी जा सकती है। तब हम एक बहुत ही मधुर और कोमल आवाज को सुनना शुरू करते हैं; एक पुकार, शब्दों में नहीं बल्कि एहसास में। वह एहसास क्या है? यह "मैं हूँ, मैं हूँ, मैं हूँ" की आंतरिक अभिव्यक्ति है। हृदय का यह गीत हमें इस अवसर का पूरी तरह से आनंद लेने के लिए बुलाता है और यह अवसर कुछ और नहीं बल्कि जीवन ही है। कितनी भी गंदगी क्यों न हो, कमल का फूल हमेशा सुंदर दिखाई देता है। जब हम चुनौतियों से घिरा हुआ महसूस करें तो हम यह चुन सकते हैं कि परिस्थिति रूपी गंदगी, हमें अपने जीवन के सरल आनंद को लेने से रोक ना पाये। आयोजको ने शांति शिक्षा कार्यक्रम न्यू वेंचर प्रेम.रावत.डॉट.कॉम टीम हरदोई के सभी उदारमना सहयोगियों को धन्यवाद ज्ञापित किया है । कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मनोज गुप्ता शिव स्वरूप सिंह दीप कुमार सोनी सचिन स्वर्णकार मैं भी अपना योगदान दिया।
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