हरदोई में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, 20.66 लाख बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य
हरदोई (आरएनआई) जनपद में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) का आयोजन किया जाएगा। अभियान के तहत 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 20.66 लाख बच्चों को पेट से कीड़े निकालने की दवा एल्बेन्डाजोल खिलाई जाएगी। इसकी तैयारियों को लेकर सोमवार को स्वामी विवेकानंद सभागार, कलेक्ट्रेट हरदोई में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अन्तर्विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अभियान के दिन कोई भी बच्चा दवा खाने से वंचित न रहे। इसके लिए विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। जो बच्चे बीमारी या अनुपस्थिति के कारण दवा नहीं ले पाएंगे, उन्हें 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के तहत दवा खिलाई जाएगी।
समन्वय बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडेय, कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी तथा समस्त ब्लॉकों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडेय ने बताया कि वर्ष में दो बार फरवरी और अगस्त माह में एल्बेन्डाजोल दवा खिलाई जाती है। इस बार जनपद के शहरी क्षेत्र एवं 17 ब्लॉकों के 4,960 सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व निजी विद्यालयों तथा 3,542 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को दवा दी जाएगी। इसके साथ ही ब्लॉक कछौना व सुरसा में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत भी एल्बेन्डाजोल खिलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि कृमि संक्रमण बच्चों में एनीमिया का प्रमुख कारण है। पेट में कीड़े होने से बच्चों की शारीरिक वृद्धि प्रभावित होती है और वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। इसलिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता अभिभावकों को दवा के लाभों के बारे में जागरूक करें।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के नोडल अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि 1 से 2 वर्ष आयु के बच्चों को एल्बेन्डाजोल की आधी गोली तथा 2 से 19 वर्ष आयु के बच्चों को एक पूरी गोली दी जाएगी। गोली को चूरा बनाकर या चबाकर ही खिलाया जाएगा और इसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता की निगरानी में खिलाना अनिवार्य होगा।
दवा सेवन के बाद कुछ बच्चों में उल्टी, जी मिचलाना, चक्कर आना या पेट दर्द जैसे हल्के प्रतिकूल प्रभाव दिख सकते हैं। उन्होंने बताया कि इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है, यह कीड़ों के मरने के कारण होता है और कुछ समय में स्वयं समाप्त हो जाता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए जिले व ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) का गठन किया गया है।
जो बच्चे 10 फरवरी को दवा नहीं ले पाएंगे, उनके लिए 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा।
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