हंगामे के साये में लोकसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

Aug 21, 2025 - 20:51
Aug 21, 2025 - 20:52
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हंगामे के साये में लोकसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नई दिल्ली (आरएनआई) लोकसभा का मानसून सत्र आज अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। यह सत्र 21 जुलाई से शुरू हुआ था।पूरे सत्र के दौरान विपक्षी दलों के लगातार हंगामे एवं विरोध-प्रदर्शन  से संसद का माहौल गर्म रहा।

सत्र के अंतिम दिन भी सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सांसदों के विरोध और हंगामें के चलते कुछ देर बाद ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

इस सत्र के दौरान विपक्षी सांसद बिहार की मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) पर विस्तृत चर्चा की मांग करते रहे। विपक्ष ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में हेरफेर की साजिश का भी आरोप लगाया। सदन के भीतर और बाहर इसी मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की।

सत्र के आखिरी दिन अपने समापन भाषण में लोकसभा अध्यक्ष श्री बिरला ने सदन में लगातार और नियोजित व्यवधानों पर क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा या संसद परिसर में नारेबाजी, तख्तियां दिखाना और नियोजित व्यवधान संसदीय कार्यवाही की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।

श्री बिरला ने कहा कि जनता को अपने प्रतिनिधियों से बहुत उम्मीदें होती हैं, इसलिए उन्हें सदन में अपने समय का सदुपयोग जनहित की समस्याओं एवं मुद्दों तथा महत्वपूर्ण विधेयकों पर गंभीर और सार्थक चर्चा के लिए करना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि सत्र के दौरान उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों को सदन में बोलने और महत्वपूर्ण विधेयकों एवं जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के पर्याप्त अवसर दिए। हालांकि लगातार गतिरोध दुर्भाग्यपूर्ण रहा। 

श्री बिरला ने बताया कि सत्र की कार्यसूची में 419 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे, लेकिन व्यवधानों के कारण केवल 55 प्रश्नों के ही मौखिक उत्तर दिए जा सके।

उन्होंने बताया कि सत्र की शुरुआत में सभी दलों ने यह निर्णय लिया था, कि इस सत्र में120 घंटे चर्चा और संवाद करेगा तथा कार्यमंत्रणा समिति भी इससे सहमत थी, लेकिन लगातार गतिरोध के कारण इस सत्र में मात्र 37 घंटे ही कामकाज हो पाया। 

श्री बिरला ने यह भी बताया कि सत्र के दौरान 14 सरकारी विधेयक पेश किए गए और 12 विधेयक पारित किए गए। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा 28 जुलाई को शुरू हुई और 29 जुलाई को प्रधानमंत्री के उत्तर के साथ इसका समापन हुआ। 

श्री बिरला ने बताया कि 18 अगस्त को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों पर एक विशेष चर्चा शुरू की गई।


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