एसबीआई रिपोर्ट: वेनेजुएला से तेल खरीदने पर भारत को सालाना 27,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव
नई दिल्ली (आरएनआई)। भारत यदि अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में रणनीतिक बदलाव करते हुए रूस की जगह वेनेजुएला से अधिक मात्रा में तेल खरीदता है, तो उसे हर साल करीब 3 अरब डॉलर यानी लगभग 27,081 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह अनुमान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला का हैवी क्रूड फिलहाल लगभग 51 डॉलर प्रति बैरल की दर पर उपलब्ध है। यदि इस पर 10 से 12 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट मिलती है, तो लंबी दूरी, शिपिंग और बीमा जैसी अतिरिक्त लागतों के बावजूद यह सौदा भारतीय तेल कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। एसबीआई ने एक विश्लेषणात्मक परिदृश्य में यह आकलन किया कि अगर भारत रूसी कच्चे तेल की जगह बड़े पैमाने पर वेनेजुएला से आयात करे, तो अनुकूल शर्तों में यह भारी बचत संभव है।
हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि यह गणना कई व्यावहारिक कारकों पर निर्भर करती है। वेनेजुएला भौगोलिक रूप से भारत से काफी दूर है। वहां से तेल लाने की समुद्री दूरी पश्चिम एशिया के मुकाबले लगभग पांच गुना और रूस के मुकाबले करीब दोगुनी है। इससे परिवहन समय, फ्रेट चार्ज और बीमा प्रीमियम बढ़ जाते हैं, जो कुल लागत को प्रभावित करते हैं।
रिपोर्ट में भारत की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता को भी अहम बताया गया है। वेनेजुएला का हैवी क्रूड प्रोसेस करने के लिए रिफाइनरियों के पास उपयुक्त तकनीक और अलग-अलग ग्रेड के कच्चे तेल को मिलाने की क्षमता होनी जरूरी है। ब्लेंडिंग की लागत और तकनीकी अनुकूलता यह तय करेगी कि आयात वास्तव में कितना लाभकारी रहेगा।
एसबीआई रिसर्च ने यह भी चेतावनी दी है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां इस समीकरण को बदल सकती हैं। यदि यूक्रेन युद्ध में तनाव कम होता है और रूसी तेल पर मिल रही मौजूदा भारी छूट घटती है, तो आयात रणनीति फिर से बदलनी पड़ सकती है। भविष्य में भारत का कच्चा तेल आयात मिश्रण पूरी तरह किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय रूस, वेनेजुएला, मध्य पूर्व और अन्य आपूर्तिकर्ताओं के बीच संतुलन पर आधारित होगा। यह संतुलन अंतरराष्ट्रीय कीमतों, उपलब्ध छूट, लॉजिस्टिक्स लागत और भारतीय रिफाइनरियों की तकनीकी जरूरतों के आधार पर तय किया जाएगा।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट संकेत देती है कि सही वाणिज्यिक शर्तों और लॉजिस्टिक प्रबंधन के साथ वेनेजुएला भारत के लिए कच्चे तेल का एक किफायती विकल्प बन सकता है, लेकिन अंतिम लाभ कई वैश्विक और तकनीकी कारकों पर निर्भर करेगा।
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