विश्व संस्कृत दिवस: केवल भाषा नहीं, संस्कृति और ज्ञान की अमर धारा
नई दिल्ली (आरएनआई) आज पूरे देश में विश्व संस्कृत दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दिन केवल एक भाषा का उत्सव नहीं, बल्कि उस महान परंपरा का सम्मान है जिसने सहस्रों वर्षों तक भारतीय ज्ञान, दर्शन, विज्ञान और साहित्य को संरक्षित रखा। संस्कृत को न केवल विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक माना जाता है, बल्कि इसे "देववाणी" के रूप में भी प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है।
संस्कृत दिवस हर वर्ष श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो रक्षाबंधन के पावन पर्व के साथ आता है। विद्वानों के अनुसार, यह अवसर हमें याद दिलाता है कि संस्कृत सिर्फ अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी अनमोल मार्गदर्शक है।
विश्वविद्यालयों, विद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में आज विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें संस्कृत श्लोक वाचन, नाट्य प्रस्तुतियां, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और कार्यशालाएं शामिल हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अरुण शर्मा ने कहा, "संस्कृत में निहित साहित्य का विस्तार इतना विशाल है कि उसका कोई समकक्ष दुनिया में नहीं है। वेद, उपनिषद, महाकाव्य और शास्त्र आज भी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।"
सरकार और कई गैर-सरकारी संगठन आधुनिक तकनीक के माध्यम से संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के प्रयास कर रहे हैं। मोबाइल ऐप, ऑनलाइन कोर्स और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए युवा पीढ़ी को इस भाषा से जोड़ा जा रहा है।
संस्कृत दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने भी संदेश जारी कर कहा कि "संस्कृत भारत की आत्मा है। इसे सीखना और संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस अद्वितीय ज्ञान-विरासत से जुड़ी रहें।"
संस्कृत दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और पहचान का जीवंत स्वरूप है—और संस्कृत इस विरासत का सबसे उज्ज्वल रत्न है।
Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0



