भारत से दक्षिण अफ्रीका जा रहे जहाज पर सोमालिया तट के पास हमला, समुद्री डाकुओं पर शक
सोमालिया (आरएनआई), 6 नवंबर 2025। हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को चुनौती देते हुए गुरुवार को सोमालिया के तट के पास सशस्त्र हमलावरों ने एक व्यापारी जहाज पर कब्जा कर लिया। यह जहाज भारत के सिक्का बंदरगाह से रवाना होकर दक्षिण अफ्रीका के डरबन जा रहा था। माना जा रहा है कि इस हमले के पीछे सोमाली समुद्री डाकुओं का हाथ है, जो हाल के महीनों में फिर से सक्रिय हो गए हैं।
ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) सेंटर ने घटना की पुष्टि करते हुए अलर्ट जारी किया है और क्षेत्र में मौजूद अन्य जहाजों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। वहीं, निजी सुरक्षा एजेंसी एम्ब्रे (Ambrey) ने बताया कि हमला एक माल्टा के झंडे वाले टैंकर पर हुआ, जो भारतीय तट से दक्षिण अफ्रीका जा रहा था। हमलावरों के पास मशीन गन और रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड जैसे भारी हथियार थे।
एजेंसी ने कहा कि यह हमला सोमाली समुद्री डाकुओं की ताजा गतिविधियों का हिस्सा प्रतीत होता है। हाल ही में इन्हीं डाकुओं द्वारा एक ईरानी मछली पकड़ने वाली नौका पर कब्जा करने की भी खबर सामने आई थी, हालांकि ईरानी सरकार ने उस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।
गौरतलब है कि सोमालिया के तट के पास समुद्री डकैती 2011 में चरम पर थी, जब 237 जहाजों पर हमले दर्ज किए गए थे। उस दौरान डाकुओं ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को करीब 7 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया था, जिसमें 1.6 करोड़ डॉलर फिरौती के रूप में दिए गए थे। बाद में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गश्त, बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल और सोमालिया में राजनीतिक स्थिरता आने के बाद इन घटनाओं में भारी कमी आई थी।
हालांकि, पिछले एक वर्ष में समुद्री डकैती की घटनाओं में फिर से वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमलों से उत्पन्न अव्यवस्था और सुरक्षा शून्यता का लाभ उठाकर सोमाली डाकुओं ने फिर से समुद्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
इंटरनेशनल मैरीटाइम ब्यूरो (IMB) के अनुसार, वर्ष 2024 में सोमालिया के तट के पास जहाजों पर हमलों की सात घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2025 में अब तक कई मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भी डाकुओं ने कब्जे में लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताजा हमला हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक बार फिर संयुक्त नौसैनिक गश्त और निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा ताकि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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