बालिका दिवस के अवसर पर बालिकाओं के अधिकारों, पीसीपीएनडीटी एक्ट, पॉश एक्ट एवं बाल विवाह निषेध अधिनियम पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन
हरदोई (आरएनआई) राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदोई की अध्यक्षता में न्यायाधीश श्रीमती रीता कौशिक एवं अपर जिला जज/सचिव भूपेंद्र प्रताप के मार्गदर्शन में तथा तहसील विधिक सेवा समिति सदर के सचिव/तहसीलदार सचिंद्र कुमार शुक्ला के निर्देशन में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, हरदोई में बालिका दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में बालिकाओं के जन्म एवं शिक्षा का अधिकार, लिंग निर्धारण की रोकथाम (पीसीपीएनडीटी एक्ट), कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (पॉश एक्ट 2013), बच्चों के कानूनी अधिकार एवं बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्यालय से उपस्थित अशोक कुमार एवं तहसील सदर की लीगल एड क्लीनिक से कीर्ति कश्यप द्वारा छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों, कन्या सुमंगला योजना, 6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (आरटीई एक्ट) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए निजी विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा के प्रावधानों की जानकारी दी गई।
बालिकाओं को शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि शिक्षा के माध्यम से ही महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बन सकती हैं। महिला अपराध से संबंधित किसी भी समस्या की स्थिति में टोल-फ्री नंबर 1090 पर संपर्क करने की सलाह दी गई।
पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 के संबंध में बताया गया कि गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग की पहचान एवं उसका खुलासा करना दंडनीय अपराध है। इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर प्रथम अपराध में 3 वर्ष तक का कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना, पुनरावृत्ति पर 5 वर्ष तक का कारावास, ₹50,000 जुर्माना तथा चिकित्सकीय लाइसेंस निरस्तीकरण का प्रावधान है।
पीएलवी श्यामू सिंह द्वारा बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह अधिनियम 1 नवंबर 2007 से लागू है तथा सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है। 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष एवं 18 वर्ष से कम आयु की महिला का विवाह कानूनन अपराध है, जिसमें 2 वर्ष तक का कारावास अथवा जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यह अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती है। बाल विवाह की शिकायत बाल विवाह निषेध अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट, न्यायालय या पुलिस के समक्ष की जा सकती है।
कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 (पॉश एक्ट) के अंतर्गत बताया गया कि प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। पीड़िता की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाती है। असमर्थ स्थिति में पीड़िता का कानूनी उत्तराधिकारी भी शिकायत दर्ज करा सकता है।
साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित निःशुल्क विधिक सेवाओं एवं नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी जानकारी दी गई।
शिविर में प्रधानाचार्य सुषमा दुबे, शिक्षिकाएं प्रत्यूष सिंह, सुषमा पाठक, बड़ी संख्या में छात्राएं एवं विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।
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