बजट से बाजार निराश, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट; जानिए आम बजट 2026–27 की 10 बड़ी घोषणाएं और उनका असर
नई दिल्ली (आरएनआई)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026–27 का आम बजट पेश करते हुए लगातार नौवां बजट प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड बनाया, लेकिन बाजार की पहली प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं रही। बजट भाषण के दौरान ही सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखी गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों को घोषणाओं से अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिला। खास बात यह रही कि बजट पेश होने के कारण रविवार को भी शेयर बाजार खुले रहे।
लोकसभा में 85 मिनट के अपने भाषण में वित्त मंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कराधान, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे समेत कई क्षेत्रों के लिए बड़ी घोषणाएं कीं। सरकार ने पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसे अर्थव्यवस्था को “पावर बूस्टर” देने वाला कदम बताया गया। नई सड़कों, पुलों और रेलवे लाइनों के निर्माण से रोजगार सृजन की उम्मीद जताई गई है, साथ ही निजी निवेश को बढ़ावा देने की बात भी कही गई।
विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग पर 40,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन नए केमिकल पार्क और मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत उपकरण और सामग्रियों के घरेलू उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए “चैंपियन एमएसएमई” कोष बनाने की घोषणा की गई है। खनिज संपन्न राज्यों—ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु—में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना की योजना है। कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने और स्टील व सीमेंट जैसे कोर सेक्टर के लिए 20,000 करोड़ रुपये के प्रावधान की भी घोषणा की गई।
सामाजिक क्षेत्र में दिव्यांगजन कौशल योजना और दिव्यांग सहारा योजना शुरू करने की बात कही गई है। रांची में नेशनल मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाएगा। खेलो इंडिया मिशन के जरिए खेल क्षेत्र को नया प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थान खोले जाएंगे। सरकार ने प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास बनाने, वेटरनरी कॉलेज और डायग्नोस्टिक लैब के लिए पूंजीगत सब्सिडी देने और 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों के विकास की भी घोषणा की है। पूर्वोत्तर में बौद्ध सर्किट के विकास की योजना भी लाई जाएगी।
कराधान के मोर्चे पर कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे को आयकर से छूट देने का प्रस्ताव है। विदेशी पर्यटन पैकेज पर टीसीएस दर घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। जिंस वायदा कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर बढ़ाया गया है। सरकार ने विदेशी कंपनियों को भारत में डेटा सेंटर के माध्यम से क्लाउड सेवाएं देने पर 2047 तक कर छूट देने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, शेयर बायबैक को पूंजीगत लाभ के रूप में कराधान के दायरे में लाने की बात कही गई है।
वित्त मंत्री ने राजकोषीय अनुशासन पर भी जोर दिया। 2026–27 में राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो चालू वर्ष के 4.4 प्रतिशत से कम है। कर्ज-जीडीपी अनुपात 55.6 प्रतिशत रखने का लक्ष्य है। सरकार का कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित है। जानकारों के अनुसार, घाटा कम होने से सरकार का ब्याज बोझ घटेगा, बाजार से कम उधारी लेनी पड़ेगी और निजी क्षेत्र के लिए कर्ज सस्ता हो सकता है। इससे भारत की वैश्विक क्रेडिट रेटिंग को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।
हालांकि दीर्घकालिक दृष्टि से ये घोषणाएं विकासोन्मुख मानी जा रही हैं, लेकिन शेयर बाजार की तात्कालिक गिरावट से साफ है कि निवेशक कुछ और बड़े प्रोत्साहन या कर राहत की उम्मीद कर रहे थे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन घोषणाओं का वास्तविक क्रियान्वयन अर्थव्यवस्था और बाजार को किस दिशा में ले जाता है।
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