प्राइवेट अस्पतालों पर गंभीर आरोप, “एक देश–एक डॉक्टरी एवं जांच शुल्क” कानून की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
दिल्ली/(आरएनआई) भारत में बढ़ते अपराध, न्यायिक प्रक्रिया की खामियों और निजी अस्पतालों में कथित अवैध वसूली को लेकर गरीब शक्ति दल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन प्रमुख मनोज विकट के नेतृत्व में आज संगठन के पदाधिकारियों ने जिला मुख्यालय पर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय (MOHFW) पर आरोप लगाया गया कि वह निजी अस्पतालों के दबाव में काम कर रहा है, जिससे संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 32 की भावना का उल्लंघन हो रहा है।
संगठन ने कहा कि देश की जेलों में आज भी लाखों बेगुनाह लोग बंदी के रूप में कैद हैं, जिनके मामले सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों में वर्षों से लंबित हैं। मनोज विकट ने बढ़ते अपराधों के लिए पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में बिना निष्पक्ष जांच के ही गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, जबकि किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करने का अधिकार केवल न्यायालय को है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि निजी अस्पतालों में मरीजों को अनावश्यक जांचों, महंगे उपचार और डॉक्टरों की भारी फीस के नाम पर मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। परिजनों को मरीज से मिलने-जुलने तक से रोका जाता है और मजबूरी में भारी रकम जुटाने के लिए गरीब परिवार अपराध की ओर धकेले जा रहे हैं। संगठन ने विभिन्न राज्यों के अस्पतालों में कथित अवैध वसूली और लापरवाही के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
गरीब शक्ति दल ने निजी अस्पतालों को बढ़ते अपराधों का एक बड़ा कारण बताते हुए देशभर में “एक देश–एक डॉक्टरी एवं रोग जांच उपकरण शुल्क” लागू करने, निजी अस्पतालों पर सख्त नियंत्रण और निष्पक्ष जांच एजेंसी के गठन की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में संजय सक्सेना एडवोकेट, गिरीश चंद्र सक्सेना, संजीव सागर, नासिर हुसैन, मुन्ना अहमद, नूरबी, चमेली देवी, यूनिस, जगदीश और यासीन सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे।
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