‘न तब, न अब, आगे भी नहीं देंगे हिंदी को जगह’: भाषा शहीद दिवस पर बोले एमके स्टालिन
चेन्नई (आरएनआई) — तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने रविवार को भाषा शहीद दिवस पर राज्य में ‘हिंदी के स्वीकृत होने’ के मुद्दे पर मजबूत रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में “न तब, न अब, और आगे भी कभी हिंदी को जगह नहीं दी जाएगी।” इस बयान में उन्होंने राज्य के इतिहास और भाषा आंदोलन के बलिदान को याद करते हुए यह स्पष्ट किया कि तमिल भाषा को बचाने के लिए पहले भी संघर्ष हुआ और आज भी यही प्रतिबद्धता जारी रहेगी।
स्टालिन ने सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त वीडियो भी साझा किया जिसमें 1960 के दशक में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन का इतिहास, उसमें शहीद हुए लोगों और पूर्व डीएमके नेताओं जैसे सीएन अन्नादुराई तथा एम करुणानिधि के योगदान का ज़िक्र किया गया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने हिंदी के ज़रिए तमिल भाषा, संस्कृति तथा पहचान को बचाने के लिए अपनी भूमिका निभाई और उपमहाद्वीप के कई भाषाई समुदायों के अधिकारों को सुरक्षित रखा।
स्टालिन ने उन “भाषा शहीदों” को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने तमिल भाषा की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि अब किसी भाषा के नाम पर कोई और जान नहीं जाएगी, लेकिन तमिल भाषा के प्रति प्रेम कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु हमेशा हिंदी थोपे जाने का विरोध करेगा।
तमिलनाडु आज भी दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेज़ी) का पालन करता है, और डीएमके तथा अन्य स्थानीय समूह केंद्र की नई शिक्षा नीति NEP 2020 के माध्यम से हिंदी को अनिवार्य करने के प्रयासों को ‘हिंदी थोपना’ के रूप में देखते हैं।
इस बयान से स्पष्ट होता है कि भाषा का मुद्दा तमिलनाडु में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है और राज्य सरकार इसका बचाव सक्रिय रूप से कर रही है।
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