कोलकाता में काली पूजा 2025: श्रद्धा, उल्लास और चुनौतियों के बीच

Oct 20, 2025 - 19:09
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कोलकाता में काली पूजा 2025: श्रद्धा, उल्लास और चुनौतियों के बीच

कोलकाता (आरएनआई) कोलकाता में काली पूजा 2025 ने इस साल एक विशेष रूप से भव्य रूप लिया, क्योंकि यह पर्व दीपावली के साथ एक ही दिन, 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाया गया। इस अवसर पर शहर भर में श्रद्धा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक उत्सवों का संगम देखने को मिला।

शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
ड्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष काली पूजा का शुभ मुहूर्त रात्रि 11:07 बजे से 11:56 बजे तक था। अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को अपराह्न 3:44 बजे से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर को अपराह्न 5:54 बजे तक रही। इस अवसर पर विशेष पूजा विधियों और भोग अर्पण की परंपरा का पालन किया गया। 

शहर भर में धूमधाम
कोलकाता की गलियाँ और पंडाल रात्रि के समय जगमगाते हुए दिखाई दिए। अम्हर्स्ट स्ट्रीट के पंडाल ने स्वर्ण आभा से सजा हुआ दृश्य प्रस्तुत किया, जबकि सादरन पूजा समिति ने अपने पंडाल को नियोन लाइट्स से सजाया, जो एक रंगीन सुरंग जैसा प्रतीत हो रहा था। 

पंचवटी प्लाजा में एक मंदिर-थीम वाला पंडाल विशेष आकर्षण का केंद्र बना, जहाँ श्रद्धालुओं ने देवी काली की पूजा अर्चना की। 

महंगे फूलों की बिक्री
काली पूजा के दिन लाल जवा फूलों की कीमत में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई। एक 108 फूलों की माला की कीमत ₹150 से ₹200 तक पहुँच गई, जो पिछले सप्ताह ₹25 से ₹30 के बीच थी। विपणन विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि असमय बारिश के कारण फूलों की आपूर्ति में कमी के कारण हुई है। 

पर्यावरणीय चुनौतियाँ
कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरणीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हरे पटाखों के उपयोग की अपील की थी। हालांकि, कई क्षेत्रों में अवैध और उच्च-ध्वनि वाले पटाखों की बिक्री और उपयोग की घटनाएँ सामने आईं, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण और नागरिकों की असुविधा बढ़ी। 

साथ ही, प्रतिबंधित आकाश दीपों की खुले बाजारों में बिक्री जारी रही, जिससे हवाई सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ। पुलिस ने इन अवैध वस्तुओं की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखने की चेतावनी दी है। 

व्यापारिक उछाल
इस वर्ष काली पूजा और दीपावली के दौरान कोलकाता में व्यापारिक गतिविधियों में 16% की वृद्धि देखी गई। कुल व्यापार ₹17,000 करोड़ तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष ₹14,500 करोड़ था। बाजारों में वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मिठाइयाँ और सजावट की वस्तुओं की भारी मांग देखी गई। 

कुल मिलाकर, कोलकाता में काली पूजा 2025 ने धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता का अद्वितीय मिश्रण प्रस्तुत किया। हालांकि, कुछ पर्यावरणीय और कानूनी चुनौतियाँ भी सामने आईं, लेकिन शहरवासियों ने उत्साह और जिम्मेदारी के साथ इस पर्व को मनाया।

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