साधकों के सामने पाँच महाबाधाएँ और उन्हें पार करने का मार्ग
नई दिल्ली (आरएनआई) एक नगर में एक महान संत साधकों को साधना-पथ पर मार्गदर्शन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि साधना के मार्ग पर पांच बड़ी बाधाएँ आती हैं। जो साधक सतत सावधानी और अटूट भक्ति से चलते हैं, वही इन बाधाओं को पार कर सकते हैं।
1. नियमभंग की बाधा
जब आप ईष्ट (ईश्वर) के प्रति कोई नियम लेते हैं, तो संसार आपके नियम को तोड़ने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई एकादशी व्रत रखता है, तो लोग कहेंगे, “इतना तो खा लो।” साधक को चाहिए कि वह अपने नियम को गोपनीय रखे और प्रदर्शन न करे। नियम टूटने पर व्याकुलता बढ़ती है, और यही व्याकुलता साधक को ईश्वर की ओर ले जाती है।
2. बाह्य लोगों का विरोध
साधक को हमेशा समाज के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कटाक्ष और आलोचना आएंगी। इस स्थिति में, साधक को अर्जुन की तरह एकाग्रचित्त रहकर आगे बढ़ना चाहिए और व्यर्थ के प्रपंच से दूर रहना चाहिए।
3. सिद्धियों और साधु-संतों द्वारा परीक्षा
साधक के सामने कई प्रकार के प्रलोभन आएंगे, जैसे वैभव, सुख-सुविधा या स्वादिष्ट भोजन। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने एक वर्ष का व्रत रखा है, तो विशेष दिन पर स्वादिष्ट खाने की परीक्षा होगी। इससे बचने का उपाय है त्याग और संयम।
4. देवताओं द्वारा राह अवरोधन
जब साधक की साधना में प्रगति होती है, तो देवता बाधा डाल सकते हैं। कामदेव या अन्य शक्तियाँ साधक का तप भंग करने का प्रयास कर सकती हैं। समाधान है अटूट प्रेम और भक्ति ईष्ट के चरणों में, सद्गुरु के सानिध्य में और निष्काम सात्विक साधना द्वारा देवताओं की प्रतिकूलताओं को अनुकूलताओं में बदलना।
5. अपनों का विरोध
साधक के मार्ग में कभी-कभी अपने ही विरोधी बन जाते हैं। इसे पार करने का मार्ग है यह सदा याद रखना कि हरी (ईश्वर) ही हमारा वास्तविक अपना है; सारा जगत एक भ्रम है।
इन बाधाओं से पार पाने का मार्ग
अटूट प्रीति ईष्ट में रखो।
बुद्धि को परम तत्व की ओर लगाओ और श्रद्धा के मार्ग पर बढ़ो।
प्रेम से श्रद्धा, श्रद्धा से सद्गुरु का सानिध्य, और सद्गुरु से ईश्वर प्राप्ति संभव होती है।
संत ने अंत में कहा, “जब साधक पाँचों महाबाधाओं को पार कर लेता है, तो वह केवल सार की ओर ध्यान केंद्रित करता है, संसार की नहीं। यही साधना का परम लक्ष्य है।”
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