शुभ योग में दीपावली आज, लक्ष्मी पूजन मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व जानें
नई दिल्ली (आरएनआई)। कार्तिक अमावस्या पर आज पूरे देश में धूमधाम से दीपावली पर्व मनाया जा रहा है। इस अवसर पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से किए गए पूजन से सुख-समृद्धि, धन वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त:
इस वर्ष प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन अत्यंत शुभ माना गया है। दिवाली पर पूजन का श्रेष्ठ समय आज रात 7:08 बजे से 8:18 बजे तक रहेगा। कुल 1 घंटा 11 मिनट का शुभ मुहूर्त उपलब्ध है।
अमावस्या तिथि
आरंभ: 20 अक्तूबर दोपहर 3:44 बजे
समाप्त: 21 अक्तूबर शाम 5:54 बजे
दिवाली का पर्व आज, 20 अक्तूबर 2025 को मनाया जाएगा।
प्रदोष काल का महत्व
सूर्यास्त के बाद के दो घंटे को प्रदोष काल कहा जाता है। यह दिन-रात का संधिकाल है, जब सात्विक ऊर्जा अपने चरम पर होती है। पुराणों में मान्यता है कि इसी समय लक्ष्मी जी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशमान व धार्मिक भावनाओं से युक्त घरों में प्रवेश करती हैं।
स्थिर लग्न में पूजन शुभ
वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ लग्न को स्थिर लग्न कहा गया है। इन लग्नों के साथ प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का स्थायी वास घर में होता है।
लक्ष्मी पूजन विधि
पूजन से पूर्व घर की समुचित सफाई तथा गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद निम्न क्रम का पालन करें:
मुख्य द्वार पर तोरण और रंगोली बनाएं।
साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रतिमाओं को वस्त्र पहनाएं, चुनरी और फूलों से सजाएं।
जल से भरा कलश चौकी के पास रखें।
तिलक, पुष्प और कमल अर्पित करें।
अक्षत, चांदी का सिक्का, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
घी के दीये जलाएं और कम से कम 21 दीप घर में रखें।
गणेश आरती और गणेश चालीसा का पाठ करें।
लक्ष्मी आरती और मंत्रजाप करें।
पूजा में उपयोग किए पुष्प तिजोरी में रखें और अंत में क्षमा याचना करें।
पूजन सामग्री में शामिल करें
लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा, कलश, कलावा, वस्त्र, चुनरी
गंगाजल, फूल, मालाएँ, सिंदूर, पंचामृत
बताशे, इत्र, चौकी, लाल वस्त्र
शंख, थाली, चांदी का सिक्का
कमल पुष्प, हवन कुंड, सुपारी
आम के पत्ते, प्रसाद, नारियल
मिट्टी के दीये, रुई और हवन सामग्री
रोली, कुमकुम, अक्षत और पान
पूजन के साथ ये देवता भी पूजनीय
लक्ष्मी पूजा के साथ भगवान गणेश, माता सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा करने का विधान है। इससे धन, विद्या और वैभव का समन्वित आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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