ममता बनर्जी सरकार पर गहराया संवैधानिक संकट, राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद राज्यपाल ने बड़ा संवैधानिक कदम उठाते हुए विधानसभा भंग करने और ममता मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी है। साथ ही केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। इस घटनाक्रम के बाद पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले का विरोध करते हुए दावा किया है कि पार्टी के पास अब भी स्पष्ट बहुमत मौजूद है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय जाने का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार को इस प्रकार हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
विवाद की पृष्ठभूमि में हाल के कई घटनाक्रम अहम माने जा रहे हैं। एडीआर की रिपोर्ट में राज्य के लगभग 65 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज होने का उल्लेख किया गया था। इसके अलावा सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या और मतगणना विवाद को लेकर भी विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने राज्यपाल के फैसले का समर्थन करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था और कानून व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी थी, जिसके कारण यह कदम आवश्यक हो गया।
अब पूरे मामले पर देशभर की नजरें केंद्र सरकार और सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नए चुनाव की संभावना भी तेज हो गई है, जबकि ममता बनर्जी की कुर्सी पर संकट गहराता दिखाई दे रहा है।
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