बाएं कंधे और बाईं भुजा का हर दर्द हृदयाघात का लक्षण नहीं होता

डॉ. श्रीधर द्विवेदी (प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली)

Jan 16, 2026 - 20:19
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बाएं कंधे और बाईं भुजा का हर दर्द हृदयाघात का लक्षण नहीं होता

आजकल हृदयाघात ( हार्ट अटैक) इतना आम हो गया है की हर आदमी उसके दर से आतंकित और शंकालु हो गया है । हार्ट अटैक का प्रमुख लक्षण सीने में दर्द या जलन की शिकायत ,सांस लेने में तकलीफ अतवा घुटन का अनुभव , अजीब सी बैचेनी और माथे पर पसीने की बूंदों का झलकना है । दिल सीने के बाईं ओर होता है इसलिए यह दर्द सीने के बाईं ओर या बाईं तरफ गर्दन की ओर जाता हुआ, बाएं कंधे या बाईं भुजा की ओर भी महसूस हो सकता है । अत्यंत अस्वाभाविक रूप से हार्ट अटैक का दर्द बाएं जबड़े या बाएं कान अथवा बाईं पीठ में भी हो सकता है । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की इंन सभी परिस्थितियों में मरीज को बेचैनी ,घबडाहट ,सांस लेने में तकलीफ या मस्तक पर पसीने की शिकायत भी होती है । 

कुशल चिकित्सक मरीज की शिकायत सुनने के साथ साथ उसके हाव -भाव , चेहरे पर चिंता की रेखाएं , मत्थे पर पसीने की बूंदें ,सांस की रफ्तार , हृदय की गति , और ब्लड प्रेशर पर ध्यान देता है । मरीज का परीक्षण करता है । सीने में दर्द वाले स्थान का बारीकी से निरीकाशन करता है । स्पर्श करता है । आले ( स्टेथोस्कोप ) से सुनता है । कभी कभी कथित दर्द वाले स्थान छूने से पीड़ा होने पर टीट्स डिजीज या पेरीकारडाईटिस की संभावना पर ध्यान देता है । बाएं कंधे या बाईं भुजा में दर्द गर्दन की हड्डियों में स्पॉन्डीलाईटिस के कारण भी हो सकता है । इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रख कर ही मरैज या इसके परिजनों को हृदयाघात के निदान की सूचना देनी चाहिए । कहना ं होगा आजकल तत्काल इसीजी और ट्रोपोनिन जांच की सुविधा हर अस्पताल में उपलब्ध होती है जिसका उपयोग हर संभावित रोगी में करना विवेकपूर्ण होता है । 

उदाहरण : एक ५१ वर्षीय सज्जन को अचानक बाएं कंधे और बाएं हाथ में असहनीय दर्द हुआ । दर्द के अतिरिक्त उन्हें किसी प्रकार की बेचैनी, सांस लेने में कोई असुविधा या पसीने होने की शिकायत नहीं थी । चिकित्सक ने आनन -फानन में उनका ई सी जी , ईको , टी एम टी , और गर्दन का एम आर ई कर डाला । कमीज खोल कर उनके दर्द के स्थान (कंधे, बाई भुजा या बाईं तरफ की पीठ ) को किसी ने भी नहीं देखा । एक दो डीन् बाद जब मरीज को दर्द के साथ साथ वहाँ पर असहनीय जलन होना शुरू हुआ तो उसने अपने चिकित्सक से पुनः शिकायत की । उस समय भी किसी ने पीड़ा के स्थान को नहीं देखा , हार कर वह दूसरे चिकित्सक के पास गया और अपनी गाथा सुनाई ,पीड़ा का स्थान दिखाया । तब पता चला की उसे हर्पीज जास्टर की बीमारी है (चित्र १/२ ) और उसके बाएं कंधे और बाएं हाथ -पीठ में दर्द और जलन हो रही थी । कक्ष शुरू में ही किसी ने उसका कंधा और पीठ देख ली होती तो वह अनावश्यक हृदयाघात के तनाव , ईकों , ट्रेडमिल की जांच से बच सकता था । यहाँ यह बात भी सच है कि जहां शिकायत सुनने और क्लीनिकल परीक्षण के बाद हृदयाघात की रंचमात्र भी संभावना हो वहाँ यथानुसार ईको , ट्राप टी , न्यूकिलियर चित्रण , टी एम टी कराना जरूरी होता है । विज्ञ चिकित्सक इन जाँचों का उपयोग अपने विवेक से करता है । संक्षेप में कि हर बाएं तरफ (कंधे, हाथ, दांत, कान जबड़े) का दर्द हृदयाघात (हार्ट अटैक) नहीं होता ।

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