पंचायत भवन में पढ़ाई, स्कूल परिसर में कूड़े का अंबार: मुरादाबाद में शिक्षा व्यवस्था की
मुरादाबाद (आरएनआई)। शिक्षा के मंदिर की हकीकत मुरादाबाद के ग्राम पंचायत मुस्तफाबाद में किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देती है। यहां का प्राथमिक विद्यालय पिछले आठ वर्षों से पंचायत भवन में संचालित हो रहा है, जबकि स्कूल का अधूरा भवन कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका है। करीब 150 छात्रों वाला यह विद्यालय बजट की दूसरी किस्त न मिलने के कारण आज भी अधर में लटका हुआ है।
सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे पंचायत भवन का दृश्य किसी अस्थायी शिविर जैसा प्रतीत होता है। एक चटाई पर 12 बच्चे किताबें लिए बैठे हैं, वहीं पास ही दूसरी चटाई पर अलग-अलग दिशा में मुंह किए बच्चे पढ़ाई में जुटे नजर आते हैं। शिक्षिकाएं सीमित जगह में सभी कक्षाओं को एक साथ संचालित करने को मजबूर हैं। यही पंचायत भवन पिछले कई वर्षों से प्राथमिक विद्यालय मुस्तफाबाद का ठिकाना बना हुआ है।
विद्यालय का मूल भवन जर्जर होने के बाद उसे पंचायत भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि नया भवन बनना शुरू हुआ, लेकिन काम अधूरा रह गया। बाउंड्री के भीतर तीन कमरे और एक बरामदा तो बन चुका है, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हो सका। प्रधानाध्यापिका मुकेश कुमारी के अनुसार, विद्यालय निर्माण की जिम्मेदारी अल्पसंख्यक विभाग को सौंपी गई थी। पहली किस्त के बाद निर्माण कार्य कराया गया, लेकिन दूसरी किस्त के नौ लाख रुपये अब तक नहीं मिलने से काम ठप पड़ा है। अधूरे भवन में आज कूड़ा जमा है और वह उपयोग के लायक नहीं रह गया है।
शिक्षिकाओं का कहना है कि सर्दियों में बच्चों को बाहर धूप में बैठाकर किसी तरह पढ़ाई कराई जाती है, लेकिन गर्मियों में हालात और भी कठिन हो जाते हैं। पंचायत भवन के एक ही हॉल में पांच कक्षाएं एक साथ चलानी पड़ती हैं। बच्चों को चारों दिशाओं में बैठाना पड़ता है और एक कक्षा के पास दूसरी कक्षा लग जाती है। इसी भवन के बरामदे या गैलरी में रसोइया मिड-डे मील तैयार करता है, जिससे शोर और अव्यवस्था बनी रहती है। इन हालात में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
यह स्थिति न सिर्फ बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी योजनाओं और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को भी उजागर करती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0



