डॉक्टर मिथिलेश कुमारी मिश्रा साहित्य सम्मान समारोह संपन्न

Dec 1, 2025 - 16:40
Dec 1, 2025 - 16:43
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डॉक्टर मिथिलेश कुमारी मिश्रा साहित्य सम्मान समारोह संपन्न

हरदोई। श्री सरस्वती सदन सेवा समिति, हरदोई के तत्वावधान में आयोजित बहुभाषाविद साहित्यकार डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र, पूर्व निदेशक-बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना की जयन्ती पर जनपद के रचनाकारों और हिन्दी-संस्कृत की नवोदित प्रतिभाओं को मुख्य अतिथि न्यायाधीश श्री अविनाश पाण्डेय, विशेष जज, सीबीआई, पटना स्मृतिचिह्न सहित अँगवस्त्र ओढाकर सम्मानित किया. साथ ही कवयित्री श्रीमती सुधा मिश्र की काव्यकृति "भाव वेणु" का विमोचन किया। वक्ताओं ने राष्ट्रभाषा के संवर्धन के लिये सदन की रचनात्मक गतिविधियों को सराहा। दीप प्रज्ज्वलन और माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कवयित्री पल्लवी मिश्र की वाणी वन्दना से शुरू हुए समारोह में प्रशासनिक अधिकारी रहे वरिष्ठ साहित्यकार श्री ब्रजराज सिंह तोमर को मिश्रबन्धु साहित्य सम्मान से मुख्य अतिथि न्यायाधीश श्री अविनाश पाण्डेय ने सम्मानित किया. साथ ही काव्यकृति "भाव वेणु" की रचनाकार श्रीमती सुधा मिश्र को डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र साहित्य सम्मान से अलंकृत किया. सीएसएन महाविद्यालय, हरदोई में स्नात्तकोत्तर हिन्दी में सर्वोच्च अँक प्राप्त करने वाली छात्रा सुश्री अँजलि सिंह और स्नात्तकोत्तर संस्कृत में सर्वाधिक अँक प्राप्त छात्रा सुश्री गीता दुबे को डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र प्रतिभा सम्मान से न्यायाधीश श्री पाण्डेय ने पुरस्कृत किया गया। मुख्य अतिथि न्यायाधीश श्री अविनाश पाण्डेय ने साहित्य को समाज का दर्पण बताया. कहा हिन्दी, संस्कृत सहित कई भाषाओं का रचना संसार डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र के वैश्विक साहित्यिक व्यक्तित्व को रेखाँकित करता है. मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत करने की पहल को साहित्य और संस्कृति का संवर्धन व संरक्षण बताया। कहा बहुभाषाविद साहित्यकार डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र जैसी साहित्य, समाज और विभिन्न क्षेत्रों की विभूतिओं की स्मृतियों को सँजोकर उनके जीवन दर्शन को विस्तार देना सभी की समेकित जिम्मेदारी है. जिससे नयी पीढी भी नये सृजन के प्रति प्रेरित हो सके. नवोदित कवयित्री पल्लवी मिश्र व कंचन मिश्र को अँगवस्त्र ओढाकर सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता कवि एवं समीक्षक श्री अरुणेश मिश्र ने कहा मिश्रबन्धु साहित्य सम्मान हरदोई के भगवन्तनगर मल्लावाँ की जडों से जुडा होने से उसकी साहित्यिक उर्वरता को रेखाँकित करता है. कहा 1913 में मिश्रबन्धु हिन्दी इतिहास के तुलनात्मक अध्ययन के जनक के रूप में जाने गये. जो लखनऊ इंटौजा के साथ हरदोई के लिए गौरव की बात है. उन्होंने डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र को हिन्दी और संस्कृत की अनन्य साधिका बताया। श्री मिश्र के साथ कवयित्री पल्लवी ने भी काव्यपाठ से चेतना जगायी। सदन की सदस्य कवयित्री कंचन वाजपेयी ने विदुषी डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्र के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला. सदन अध्यक्ष एवं कवि श्रवण कुमार मिश्र ने अध्यक्षता की और मन्त्री मनीष कुमार मिश्र ने स्वागत किया. संचालन महेश मिश्र ने किया. पुस्तकालयाध्यक्ष सीमा मिश्र ने व्यवस्था सँभाली।समारोह में सुरेन्द्रनाथ अग्निहोत्री, डॉ. नरेशचन्द्र शुक्ल, रत्ना मिश्र, आलम रब्बानी, कमलेश पाठक, ओपी सिंह, आरडी वर्मा, कुमुदनी तिवारी, हरिवंश सिंह, अवनिकांत वाजपेयी, राजीव दुबे, डॉ. अलका गुप्ता, नीता श्रीवास्तव सहित साहित्यकार व सदन सदस्य उपस्थित रहे।

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