चाबहार पोर्ट पर ईरानी राजदूत का बड़ा बयान: बोले– रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम, सहयोग बढ़ाने की जरूरत

Feb 7, 2026 - 12:20
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चाबहार पोर्ट पर ईरानी राजदूत का बड़ा बयान: बोले– रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम, सहयोग बढ़ाने की जरूरत

नई दिल्ली (आरएनआई)। ईरान ने चाबहार बंदरगाह को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए भारत और अन्य साझेदार देशों के साथ सहयोग और मजबूत करने की वकालत की है। नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि चाबहार पोर्ट रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद जरूरी है और यह अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक पहुंच का एक अहम मार्ग बन सकता है।

प्रेस वार्ता के दौरान ईरानी राजदूत ने कहा कि चाबहार परियोजना क्षेत्रीय व्यापार, संपर्क और आर्थिक विकास को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान इस परियोजना में भारत की भूमिका को काफी अहम मानता है और दोनों देशों के रिश्तों को और आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब चाबहार पोर्ट को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों और छूट से जुड़ी नीतियों में बदलाव के कारण इस परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

चाबहार पोर्ट परियोजना को मूल रूप से अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक मार्ग को सशक्त बनाना है। यह मार्ग पाकिस्तान को बाईपास कर सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करता है, जिससे भारत के लिए इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। पोर्ट के जरिए माल ढुलाई और क्षेत्रीय व्यापार को गति देने की योजना पर लगातार काम किया जा रहा है।

भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसकी कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड वर्ष 2018 से चाबहार पोर्ट का संचालन कर रही है। 13 मई 2024 को कंपनी ने ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम संगठन के साथ 10 साल का समझौता किया था, जिसके तहत शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास और संचालन की जिम्मेदारी भारत के पास है। समझौते के तहत भारत ने पोर्ट उपकरणों की खरीद के लिए 120 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता भी पूरी कर दी है।

अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर ईरानी राजदूत ने संकेत दिया कि चाबहार परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति लगातार बदल रही है। अमेरिका ने 2018 में अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के मद्देनजर इस परियोजना को प्रतिबंधों से छूट दी थी, हालांकि बाद में यह छूट वापस ले ली गई। बातचीत के बाद सशर्त छूट को 26 अप्रैल 2026 तक बढ़ाया गया है। भारत सरकार का कहना है कि वह सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क में है, ताकि भारतीय कंपनियों के हित सुरक्षित रह सकें।

इस दौरान ईरानी राजदूत ने ओमान के मस्कट में हुई ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बातचीत का एक दौर पूरा हो चुका है और इसमें परमाणु मुद्दों पर चर्चा हुई है। ईरान ने कहा है कि वह वार्ता के नतीजों का इंतजार कर रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बीच यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है।

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