नई दिल्ली (आरएनआई)। सरकार ने बजट सत्र से ठीक पहले बुधवार को संसद में ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26’ पेश किया। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को संशोधित करते हुए 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान जारी किया गया है। यह अनुमान चालू वित्त वर्ष के अपेक्षित 7.4% के मुकाबले थोड़ा कम है, जिससे संकेत मिलता है कि अगले साल आर्थिक गति थोड़ी मंद रह सकती है।
इस सर्वे में रोजगार, निवेश, सरकारी खर्च, आरएंडडी और विदेशी निवेश जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों पर भी विस्तृत विश्लेषण शामिल किया गया है।
सर्वे की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
सरकार के अनुमान के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में GDP ग्रोथ 6.8%–7.2% रहने की संभावना है, जो मौजूदा अनुमान से थोड़ी कम है लेकिन फिर भी वैश्विक संदर्भ में ठोस वृद्धि मान ली जा रही है। वहीं वर्तमान वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 7.4% बढ़ने का अनुमान है, जो उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है।
रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक रुझान दिखे हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वाले श्रमिकों के संदर्भ में बेरोजगारी दर लगातार घटकर 3.2% हो गई है, जो 2017-18 में 6% थी। शहरी बेरोजगारी दर में भी सुधार के संकेत मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि रोजगार सृजन में सकारात्मक प्रगति हो रही है।
सरकारी व्यय के रुझानों की बात करें तो पिछले वर्ष सरकार ने अपने पूंजीगत व्यय का 75% हिस्सा तीन मुख्य क्षेत्रों — रक्षा, रेलवे और सड़क परिवहन — में खर्च किया। इसका उद्देश्य ढांचागत विकास को मजबूती देना और सुरक्षा-संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना बताया गया है।
निवेश और अनुसंधान-डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर सर्वे में Mixed संकेत आए हैं। विदेशी निवेश के मामले में सेवा क्षेत्र अग्रणी रहा है और उसे कुल इक्विटी प्रवाह का 19.1% प्राप्त हुआ। इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र का स्थान है। हालांकि, सर्वे में औद्योगिक अनुसंधान और विकास की स्थिति चिंताजनक पाई गई है, जहां यह मुख्यतः दवा, आईटी और रक्षा क्षेत्रों तक सीमित है। सर्वे में इस कमी को दूर करने और R&D को व्यापक स्तर पर बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में दो बड़ी उपलब्धियों का जिक्र भी किया गया है: भारत अब जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और इसी के साथ अर्थव्यवस्था चार ट्रिलियन डॉलर के पार जाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।
सरकार का यह सर्वे आर्थिक चुनौतियों और उपलब्धियों दोनों को संतुलित रूप से प्रस्तुत करता है, जिसमें आगे सुधार और निवेश-आधारित विकास पर फोकस बरकरार रखा गया है।