हिजबुल्ला पर कार्रवाई को लेकर नया प्रस्ताव: ट्रंप ने सीरिया की भूमिका सुझाई, दमिश्क ने सैन्य हस्तक्षेप से किया इनकार

Jun 29, 2026 - 13:21
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हिजबुल्ला पर कार्रवाई को लेकर नया प्रस्ताव: ट्रंप ने सीरिया की भूमिका सुझाई, दमिश्क ने सैन्य हस्तक्षेप से किया इनकार

लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक नए प्रस्ताव ने पश्चिम एशिया की कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने सुझाव दिया है कि हिजबुल्ला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई इस्राइल के बजाय सीरिया करे। हालांकि, सीरिया ने इस प्रस्ताव में किसी भी तरह की दिलचस्पी से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्रीय संघर्ष में सैन्य हस्तक्षेप नहीं करेगा।

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि सीरिया की वर्तमान सरकार, जिसने बशर अल-असद के शासन के बाद सत्ता संभाली है, हिजबुल्ला के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने कहा कि ट्रंप के बयान का गलत अर्थ निकाला गया है और उनकी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य देश का पुनर्निर्माण है, न कि किसी नए क्षेत्रीय संघर्ष में शामिल होना।

इस प्रस्ताव ने इस्राइल और लेबनान दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस्राइल अब भी सीरिया की नई इस्लामी नेतृत्व वाली सरकार को संदेह की नजर से देखता है और उसके सत्ता में आने के बाद दक्षिणी सीरिया के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है। वहीं, तुर्किये के बढ़ते प्रभाव और सीरिया की बदलती राजनीतिक स्थिति ने क्षेत्रीय समीकरणों को और जटिल बना दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, इस्राइल के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए विशेष बैठक भी बुलाई है। दूसरी ओर, लेबनान में लोगों को 2005 तक चले सीरियाई सैन्य प्रभाव की यादें अब भी परेशान करती हैं। ऐसे में किसी भी संभावित सीरियाई सैन्य हस्तक्षेप को लेकर वहां आशंकाएं बनी हुई हैं।

इस महीने की शुरुआत में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने लेबनान में जारी युद्ध पर चिंता जताते हुए कहा था कि संघर्ष बहुत लंबा खिंच चुका है और इसमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक हिजबुल्ला लड़ाके को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारतों को ध्वस्त करना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि सीरिया के 14 वर्ष लंबे गृहयुद्ध के दौरान हिजबुल्ला और ईरान ने तत्कालीन राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थन किया था, जबकि अहमद अल-शरा उस समय असद विरोधी विद्रोही गुट का हिस्सा थे। इसके बावजूद सत्ता संभालने के बाद नई सीरियाई सरकार लगातार यह कहती रही है कि उसकी प्राथमिकता देश का पुनर्निर्माण, स्थिरता और क्षेत्रीय संघर्षों से दूरी बनाए रखना है।

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