भरत तिवारी एनकाउंटर पर बढ़ा सियासी घमासान, न्यायिक जांच पर भी उठे सवाल
बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव में गत दिनों फर्जी मुठभेड़ में मारे गए युवक भरत भूषण तिवारी का मामला दिन व दिन सियासी रंग लेता जा रहा है। इस कांड के विरोध में अगड़े जाति के साथ साथ मुस्लिम, यादव,पासवान एवं अन्य छोटी छोटी जातियां भाजपा के खिलाफ इस कदर गोलबंद होने लगी है,जैसे सन 1978-79 में जनता पार्टी के खिलाफ उत्तर भारत खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश की आधा दर्जन घटनाओं के बाद लोग एकजुट हुए थे।
अतीत को देखें तो उन तमाम घटनास्थलों का दौरा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने की थीं।कुछ दुर्गम घटनास्थलों का दौरा स्व.श्रीमती गांधी ने हाथी एवं नाव से की थीं। इसके बाद वर्ष 1979 के अंत में हुए लोक सभा के उपचुनाव में कांग्रेस सत्ता में लौट गयी थी।हालात वैसी ही बनती जा रही है।कम से कम बिहार एवं उत्तर प्रदेश के 120 लोकसभा सीटों पर वही समीकरण बनता जा रहा है।हालांकि सत्ता के खिलाफ यह आक्रोश मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा एवं, झारखंड के एक बड़े वर्ग में भी है।किसान आंदोलन से पंजाब पहले से ही सुलग रहा है।फर्क सिर्फ इतना है,कि इस बार विपक्ष के नेता के रूप में इंदिरा गांधी नहीं राहुल गांधी हैं।
उत्तर भारत में भाजपा के खिलाफ बढ़ता आक्रोश:-बिहार में हाल में हुए कुछ मुठभेड़ों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर उठ रहे सवाल अब सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि लपटें दूर तक फैल चुकी है। जहां विपक्ष लगातार उग्र होता जा रहा है, वहीं सरकार के मंत्री भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं। नेताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक भी इस लड़ाई में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालात यह है,कि सम्राट सरकार के आधा दर्जन से अधिक मंत्री,पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं सहयोगी केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान इस मुठभेड़ पर सरकार के खिलाफ हैं।वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी एवं सम्राट के कुशवाहा समुदाय के कुछ नेता उनके साथ खड़े दिख रहे हैं,जिन्हें न निगलते बन रहा है,न ही उगलते।इन तमाम स्थितियों से यह स्पष्ट है,कि भाजपा नेतृत्व को शीघ्र कोई कड़ा कदम उठाना होगा अन्यथा अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेशविधानसभा चुनाव में उसे काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
याचिकाओं का मतलब:- भरत तिवारी मामले में बिहार की सम्राट सरकार ने न्यायिक जांच आयोग गठित कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है,मगर परिजनों एवं आम लोगों ने इसे नाकाफी करार दिया है निष्पक्ष जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, वहीं अब बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी भोजपुर के चर्चित भरत एनकाउंटर मामले पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर के एसपी को तलब करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट मांगी है।प्राथमिकी के आधार पर पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होना बड़ा संदेह पैदा करता है।
महापंचायत में दिखा जनाक्रोश:-इस घटना को लेकर 24 जून को बिलौटी गांव में विशाल महापंचायत सम्मेलन बुलाया गया।जिसमे उम्मीद से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।आयोजन समिति का दावा है, कि बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा,राजस्थान के अलावा उत्तर भारत के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए।
परिजनों को स्वतंत्र जांच का भरोसा नहीं:- मृतक के परिवार ने पुलिस और न्यायिक जांच पर भरोसा न होने की बात कही है और जांच पर सवाल उठाए हैं। मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने पुलिस प्रशासन की ओर से दी जा रही सुरक्षा लेने से भी इनकार कर दिया है। उन्होंने सवाल किया कि इसकी क्या गारंटी है, कि सुरक्षा देने वाले लोग ही उनकी जान नहीं ले लेंगे।
उन्होंने एनकाउंटर के सात दिन बीत जाने के बाद रात के अंधेरे में पहुंचे पुलिस अधिकारियों की नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि वो लोग आए थे, लुक-छिप के आए थे। देखा कि यहां पर कोई नहीं है। रात के 12:00 बजे ये लोग आए थे। हमने कहा कि आप लोग खुद को महारथी कहते हैं,और आपके नेतृत्व में मेरे बेटे का मर्डर हो गया। अब हमारे यहां किस मुंह से आए हैं आप लोग? दिन में आप क्यों नहीं आए? क्या दिन में नहीं आ सकते थे?
एस पी की भूमिका पर सवाल:-पिता ने इस पूरे मामले में एस पी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा देखिए, बिना कप्तान के आदेश के गोली नहीं चलती। थाने की कहां इतनी पावर और हस्ती है,कि वह किसी को मार सकता है? किसने गोली चलने का ऑर्डर दिया, किसने क्या किया, सब साफ है। मेरे बच्चे से सिर्फ 5 मिनट बात हुई है और उसके तुरंत बाद उसका मर्डर कर दिया गया ।
मृतक के छोटे भाई चंदन तिवारी ने वर्तमान एस पी पर डराने, धमकाने और दबाव बनाने का आरोप लगते हुए कहा है,कि जब इस मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं, उसके बावजूद हमारे एसपी साहब खुद यहां आकर हमें धमकाते हैं। उन्होंने हमसे कहा कि यह सब बंद करो, नहीं तो तुम्हारा भी वही हश्र होगा जो तुम्हारे भाई का हुआ है,तो हम इस जांच पर कैसे और क्यों भरोसा करें?
मृतक की मां आशा देवी ने कहा कि वर्तमान जांच टीम से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा है कि मुझे अब किसी पर भरोसा नहीं रह गया है। मैं सिर्फ अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहती हूं, लेकिन इस जांच से न्याय नहीं मिलेगा। वहीं मृतक की भाभी सुमन तिवारी ने पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को ही खारिज कर दिया है।
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