डीबीआर दिल्ली लैब भेजा गया: राम मंदिर में कई बार डिलीट की गई सीसीटीवी फुटेज, एसआईटी जांच में हुआ बड़ा खुलासा
डीबीआर दिल्ली लैब भेजा गया: राम मंदिर में कई बार डिलीट की गई सीसीटीवी फुटेज, एसआईटी जांच में हुआ बड़ा खुलासा
अयोध्या: (आरएनआई) अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धापूर्वक चढ़ाए गए चढ़ावे और दान की राशि में हुई कथित चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें बेहद चौंकाने वाले और गंभीर राजफाश हो रहे हैं। एसआईटी की तकनीकी जांच में यह बेहद सनसनीखेज बात सामने आई है कि मंदिर के जिस मुख्य कक्ष (नोट गणना कक्ष) में पैसों की गिनती की जाती थी, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को एक या दो बार नहीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों के भीतर कई बार जानबूझकर डिलीट किया गया है। डिजिटल साक्ष्यों के साथ हुई इस बड़ी छेड़छाड़ की कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच अधिकारियों ने सीसीटीवी के मुख्य डीबीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) को जब्त कर उसे तत्काल दिल्ली की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया है, ताकि वहां के उच्च स्तरीय एक्सपर्ट्स यह पता लगा सकें कि डेटा को कब-कब और किस सिस्टम से डिलीट किया गया था और पुरानी कड़ियों को साक्ष्य के रूप में दोबारा रिकवर किया जा सके।
डेटा डिलीट किए जाने का यह पुख्ता अंदेशा तब और गहरा गया जब ट्रस्ट के पूर्व लेखाकार महिपाल ने पूर्व में मीडिया के सामने आकर यह बड़ा दावा किया था कि उनके कार्यकाल के दौरान बेहद शातिराना तरीके से सीसीटीवी कैमरों से करीब आठ महीने का पुराना डेटा पूरी तरह गायब कर दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, जब एसआईटी के अधिकारियों ने गणना कक्ष के मौजूदा तकनीकी ढांचे का भौतिक निरीक्षण किया, तो उन्हें मजबूत शक हुआ कि शायद अभी कुछ ही दिन पहले भी रिकॉर्डिंग को डिलीट मार दिया गया है। इस पूरे खेल में तकनीक की भूमिका को समझने के लिए जांच टीम ने मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा ग्रिड स्थापित करने वाले वेंडरों और तकनीकी ऑपरेटरों को भी तलब किया और उनसे कई घंटों तक कड़ाई से पूछताछ की कि क्या वे भी इस डेटा डिलीट करने की साजिश में शामिल थे या नहीं।
इस महा-घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए एसआईटी ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए राम मंदिर से जुड़े करीब ढाई सौ से अधिक कार्यकर्ताओं, सेवादारों और कर्मचारियों को सीधे अपने रडार पर ले लिया है। इन सभी संदिग्धों की पूरी सूची तैयार कर ली गई है और उन्हें विस्तृत बयान दर्ज कराने के लिए सिलसिलेवार तरीके से समन भेजा जा रहा है; इनमें दर्जनों ऐसे रसूखदार और वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल हैं जो ट्रस्ट में अवैतनिक (बिना वेतन के) सेवा दे रहे थे, और उनके साथ तय मानदेय पर काम करने वाले नियमित कर्मचारी भी शामिल हैं। इसी कड़ी में, मंदिर के भीतर पूजा-पाठ का जिम्मा संभालने वाले पुजारियों को भी परिसर में बने ग्रीन हाउस में बुलाकर काफी देर तक पूछताछ की गई, और मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से दूसरे दिन भी मैराथन पूछताछ कर उसके पूरे बयान की बकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई ताकि वह बाद में मुकर न सके।
इस पूरी वित्तीय और प्रशासनिक धांधली के बीच ट्रस्ट के आंतरिक कामकाज का जो ढांचा सामने आया है, उसके अनुसार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में जिम्मेदारियों का विभाजन दो प्रमुख हिस्सों में किया गया था—पहला आंतरिक प्रबंधन और दूसरा बाहरी मामले। मंदिर के भीतर के तमाम आंतरिक मामलों और व्यवस्थाओं का मुख्य जिम्मा गोपाल राव और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के कंधों पर था, जबकि महासचिव चंपत राय मुख्य रूप से बाहरी और नीतिगत मामलों में ही हस्तक्षेप करते थे। यही वजह है कि नोटों की गिनती और आभूषणों के रख-रखाव की सीधी निगरानी करने वाले डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अब एसआईटी की जांच और तीखे सवालों का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ रहा है। इसी सिलसिले में गुरुवार को जांच टीम ने परिसर के बाहर 'श्रीराम निवास मंदिर' में संचालित हो रहे मुख्य ट्रस्ट कार्यालय का भी औचक निरीक्षण कर वहां से कई महत्वपूर्ण वित्तीय रजिस्टर और दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।
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